तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद जारी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कलगम (TVK) ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यदि एमके स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कलगम (DMK) या एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है, तो TVK अपने सभी 107 विधायकों से सामूहिक इस्तीफा दिलाने पर विचार कर सकती है।
हालांकि विजय ने स्वयं सार्वजनिक रूप से इस पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और सत्ता गठन को लेकर चल रही खींचतान ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। TVK नेताओं का मानना है कि चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद उन्हें सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
दौरान खबरें आ रहीं है कि DMK ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी AIADMK के साथ बैकचैनल बातचीत शुरू की है, ताकि विजय की पार्टी को सरकार बनाने से रोका जा सके। 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में DMK को 59 सीटें और AIADMK को 47 सीटें मिली थीं।
वहीं, TVK ने कुल 108 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें से दो सीटों पर स्वयं विजय विजयी हुए थे। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिसके बाद पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के साथ TVK का आंकड़ा 112 तक पहुंचता है, लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है।
सूत्रों के अनुसार, TVK नेतृत्व इस बात से खास तौर पर नाराज है कि DMK और AIADMK कथित रूप से एक साझा रणनीति के तहत विजय को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता ने बिखरा हुआ जनादेश जरूर दिया है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक वरिष्ठ TVK नेता ने कहा, “जनादेश स्पष्ट रूप से विभाजित है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी को सत्ता गठन की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।”
सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने के उद्देश्य से TVK लगातार DMK के सहयोगी दलों से संपर्क बनाए हुए है। पार्टी ने विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK), वाम दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) समेत कई दलों से बातचीत की है, लेकिन अब तक किसी ने औपचारिक समर्थन का ऐलान नहीं किया है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह स्थिति नई अस्थिरता पैदा कर सकती है। यदि TVK वास्तव में सामूहिक इस्तीफे का कदम उठाती है, तो राज्य में राजनीतिक संकट निर्माण हो सकता है साथ ही राज्य में फिर एक बार उपचुनाव होतें दिख सकते है। फिलहाल सभी दलों की नजर राज्यपाल के अगले कदम और संभावित गठबंधन समीकरणों पर टिकी हुई है।
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