31 C
Mumbai
Thursday, February 12, 2026
होमदेश दुनियाजस्टिस बीआर गवई के 5 फैसले: नोटबंदी से बुलडोजर न्याय तक असर!

जस्टिस बीआर गवई के 5 फैसले: नोटबंदी से बुलडोजर न्याय तक असर!

जस्टिस बीआर गवई ने 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है| जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के कई संविधान पीठ का हिस्सा रहे हैं| 

Google News Follow

Related

देश के 52 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने शपथ ले ली है| राष्ट्रपति भवन में बुधवार को आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस गवई को शपथ दिलाई| उन्होंने हिंदी में शपथ ली| जस्टिस गवई को 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था|

इससे पहले वो बांबे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में जज के रूप में काम कर रहे थे| उनका कार्यकाल इस साल 23 नवंबर तक होगा|सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई उन चुनिंदा जजों में से हैं जिनके फैसलों का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असर देखने को मिला है।

उनकी न्यायिक दृष्टि और स्पष्ट टिप्पणियों ने कई बार बहस को जन्म दिया है। यहां हम नजर डालते हैं उनके पांच ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर, जिनका सीधा असर आम जनता, सरकार और संवैधानिक मूल्यों पर पड़ा:

नोटबंदी फैसला: संवैधानिकता को दी हरी झंडी: जस्टिस गवई उस पांच जजों की संविधान पीठ का हिस्सा थे जिसने 2016 की नोटबंदी को 4-1 के बहुमत से वैध ठहराया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सोच-समझकर आर्थिक स्थिरता के लिए लिया गया था, और इसमें प्रक्रिया का पालन हुआ।

बुलडोजर न्याय पर कड़ी टिप्पणी: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर जब याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, तो जस्टिस गवई ने साफ कहा कि “कानून का राज सबसे ऊपर है” और बिना कानूनी प्रक्रिया के की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया। इससे “बुलडोजर न्याय” पर पहली बार सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट नजर आई।

सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर की नियुक्ति पर फैसला: जस्टिस गवई ने उस फैसले में भाग लिया, जिसमें सीवीसी की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की जरूरत पर बल दिया गया। इससे संस्थागत ईमानदारी पर भरोसा बढ़ा।

अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम पर समीक्षा: एक अहम फैसले में उन्होंने SC/ST एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ दिए गए पुराने फैसले को संतुलित दृष्टिकोण से देखा और यह स्पष्ट किया कि कानून का दुरुपयोग न हो, लेकिन संरक्षण भी कमज़ोर न पड़े।

पर्यावरण संरक्षण और खनन नीति पर दखल: जस्टिस गवई ने कई बार खनन नीति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में कड़ा रुख अपनाया। खासकर जब अवैध खनन को लेकर सरकार की उदासीनता सामने आई, तब उन्होंने “प्रकृति को मुनाफे का जरिया नहीं” कहकर न्यायपालिका की जिम्मेदारी को रेखांकित किया।

जस्टिस बी.आर. गवई के फैसले न केवल कानून की व्याख्या करते हैं, बल्कि समाज में न्याय की गूंज भी पैदा करते हैं। चाहे सरकार के फैसलों को वैध ठहराना हो या सत्ता के दुरुपयोग पर लगाम कसना – उनका न्यायिक हस्तक्षेप व्यापक असर छोड़ता रहा है।

यह भी पढ़ें-

हिमाचल के सोलन में मिले जीवाश्म, 60 करोड़ साल पुराने होने का दावा!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,223फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
291,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें