हरियाणा: अवैध कब्जों पर कार्रवाई के खिलाफ युवाओं के जरिए AAP की राजनीतिक चाल!

पार्टी न केवल विरोध को हवा दे रही है, बल्कि दिल्ली के युवाओं को फरीदाबाद भेजकर ‘धरातली समर्थन’ देने का दावा कर रही है।

हरियाणा: अवैध कब्जों पर कार्रवाई के खिलाफ युवाओं के जरिए AAP की राजनीतिक चाल!

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हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अरावली क्षेत्र में चल रहे अवैध कब्जा हटाओ अभियान को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। पार्टी ने न केवल अनंगपुर संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 13 जुलाई की ‘महापंचायत’ को समर्थन दिया है, बल्कि दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र के 360 गांवों के युवाओं से इसमें भारी संख्या में पहुंचने की अपील भी की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अनंगपुर और उसके आस-पास के गांवों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को तोड़ा जा रहा है।

11 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “हम अपने गांव की रक्षा के लिए दिल्ली के सभी 360 गांवों के युवाओं से अपील करते हैं कि वे 13 जुलाई को अनंगपुर महापंचायत में शामिल हों। हम एकजुट होकर सरकार की जबरदस्ती का विरोध करेंगे।” भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार पहले ही गांव की जमीन अधिग्रहित कर चुकी है, और अब जो थोड़ी-बहुत जमीन बची है, उसे भी छीनने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि AAP का प्रतिनिधिमंडल महापंचायत में भाग लेगा और सभी कार्यकर्ताओं से अनंगपुर पहुंचने की अपील की।

अनंगपुर फरीदाबाद का एक ऐतिहासिक गांव है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (PLPA), 1990 के तहत संरक्षित वन भूमि के रूप में वर्गीकृत है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में स्पष्ट रूप से कहा था कि PLPA के अंतर्गत संरक्षित भूमि को वन क्षेत्र माना जाए और उस पर बने किसी भी अवैध ढांचे को गिराया जाए। इससे पहले, 2013 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी ऐसे संरक्षित क्षेत्रों में गैर-वन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।

हरियाणा सरकार द्वारा 2023 में किए गए सर्वेक्षण में अनंगपुर, अंखीर, लक्कड़पुर और मेवला महाराजपुर गांवों में कुल 6,793 अवैध संरचनाएं चिन्हित की गई थीं। इनमें फार्महाउस, रिहायशी मकान और बैंक्वेट हॉल शामिल हैं। अकेले अनंगपुर में 5,948 अवैध निर्माण पाए गए। पिछले 20 दिनों में 200 से अधिक ढांचे गिराए जा चुके हैं और लगभग 80 बड़े फार्महाउस ध्वस्त किए जा चुके हैं। Forest Department और नगर निगम मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं।

कई स्थानीय निवासी गांव की ऐतिहासिक विरासत का हवाला देकर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, लेकिन तीन जुलाई को जब सरकारी टीम अवैध निर्माण ढहाने पहुंची तो उस पर हमला हुआ और तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इस बीच AAP इस स्थानीय आक्रोश को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है। पार्टी न केवल विरोध को हवा दे रही है, बल्कि दिल्ली के युवाओं को फरीदाबाद भेजकर ‘धरातली समर्थन’ देने का दावा कर रही है।

इस बीच केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वैध घर को नहीं तोड़ा जाएगा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित इस कार्रवाई की रिपोर्ट जुलाई के अंत तक न्यायालय में पेश की जानी है।

सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद AAP द्वारा इस तरह के विरोध को बढ़ावा देना, कानून व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनौती बन सकता है।

जहां एक ओर न्यायपालिका के आदेशों का पालन करते हुए वन विभाग और प्रशासन संरक्षित भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करा रहा है, वहीं आम आदमी पार्टी इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक मंच पर भुनाने की कोशिश कर रही है। इससे न केवल प्रशासनिक कार्रवाई बाधित हो सकती है, बल्कि कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

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