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Monday, June 1, 2026
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फर्जी ‘आईबी कॉल’ करने वाला AAP वडोदरा का अध्यक्ष अशोक ओझा गिरफ्तार; पार्टी के आरोपों ने लिया उल्टा मोड़

खुफिया एजेंसी के नाम पर धमकी वाले कॉल का मामला निकला आंतरिक गुटबाजी से जुड़ा, जांच में AAP नेता ही बने आरोपी

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गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारियों के नाम पर धमकी भरे फोन कॉल आने के मामले ने अब अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है। जिस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो ने सरकार और एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए जोर-शोर से उठाया था, उसी मामले में अब AAP के वडोदरा शहर अध्यक्ष अशोक ओझा आरोपी के रूप में गिरफ्तार हुए है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कथित “आईबी कॉल” किसी सरकारी एजेंसी से नहीं बल्कि पार्टी के अंदरूनी विवाद और गुटबाजी से जुड़े हो सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब गुजरात में AAP के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें ऐसे फोन कॉल प्राप्त हो रहे हैं जिनमें कॉल करने वाला स्वयं को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का अधिकारी बता रहा है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक निगरानी और विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश के रूप में पेश किया।

मामले को तब और तूल मिला जब पूर्व दिल्ली विधायक और AAP नेता दुर्गेश पाठक ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं को एक विशेष मोबाइल नंबर से कॉल किए जा रहे हैं और कॉल करने वाला खुद को आईबी अधिकारी बता रहा है।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के एक कार्यकर्ता को ऐसा कॉल आया था और उन्होंने स्वयं उस नंबर पर फोन किया। केजरीवाल के अनुसार, जब उन्होंने पूछा कि क्या कॉल करने वाला आईबी से है, तो जवाब “हां” में मिला। हालांकि, जब उन्होंने अपनी पहचान अरविंद केजरीवाल के रूप में बताई तो कथित तौर पर कॉल तुरंत काट दिया गया।

इसके बाद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर किस कानून के तहत इंटेलिजेंस ब्यूरो राजनीतिक गतिविधियों के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले नागरिकों की जांच कर सकता है। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए और मामले को राजनीतिक उत्पीड़न का मुद्दा बताया।

पुलिस जांच में खुलासा

दौरान आनंद जिले के AAP कार्यकर्ता केशव चौहान ने भी इसी तरह का फोन कॉल मिलने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर आनंद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया और कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू हुई।

जांच के दौरान पहला बड़ा सुराग तब मिला जब विवादित मोबाइल नंबर का संबंध आनंद निवासी नितिन डोबारिया से जुड़ा पाया गया। पूछताछ में डोबारिया ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने ये कॉल वडोदरा AAP अध्यक्ष अशोक ओझा के निर्देश पर किए थे और कई बार खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताया था।

इस खुलासे के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और अशोक ओझा से पूछताछ की। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम का किसी सरकारी एजेंसी या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से कोई संबंध नहीं मिला। इसके बजाय मामला पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और संगठनात्मक शक्ति संघर्ष से जुड़ा बताया जा रहा है।

कौन हैं अशोक ओझा?

अशोक ओझा गुजरात में आम आदमी पार्टी का एक जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वे पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा रहे और राज्य में AAP के विस्तार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। जब पार्टी गुजरात में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही थी, उस दौरान ओझा को अक्सर शीर्ष नेतृत्व के साथ देखा जाता था।

विभिन्न कार्यक्रमों और राजनीतिक आयोजनों की तस्वीरों में ओझा को AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, गुजरात इकाई के नेताओं इसुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया और मनोज सोरठिया सहित कई प्रमुख चेहरों के साथ देखा गया है। पार्टी गतिविधियों के समन्वय के लिए उनके दिल्ली दौरे भी चर्चा में रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, ओझा की पहुंच केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं, बल्कि वह संगठन के भीतर प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते है। पूर्व गुजरात प्रभारी गोपाल राय के साथ भी उनके करीबी संबंध बताए जाते रहे हैं।

आंतरिक राजनीति की आशंका

रिपोर्टों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी की गुजरात यूनिट में दिल्ली के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक को राज्य में अधिक सक्रिय भूमिका सौंपे जाने को लेकर असंतोष बढ़ा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि केंद्रीय नेतृत्व की बढ़ती दखलंदाजी से स्थानीय संगठन में कुछ नेताओं को अपने प्रभाव में कमी आने की आशंका थी।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कथित फर्जी आईबी कॉल अभियान का उद्देश्य कुछ नेताओं पर दबाव बनाना और संगठन के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित करना था।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विवाद की दिशा ही बदल दी है। जिस मामले को AAP नेतृत्व ने सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित दबाव और निगरानी का उदाहरण बताया था, उसी मामले में अब पार्टी के अपने शहर अध्यक्ष और उनके सहयोगी की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस जांच के निष्कर्षों ने इस विवाद को सरकारी एजेंसियों से हटाकर पार्टी के भीतर के राजनीतिक संघर्ष और संगठनात्मक खींचतान की ओर मोड़ दिया है।

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