कोलकाता नगर निगम (KMC) ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बॅनर्जी की मां लता बॅनर्जी को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं दिया गया या कथित अनधिकृत हिस्सों को नहीं हटाया गया, तो नगर निगम ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर सकता है। KMC के बिल्डिंग विभाग द्वारा बरो IX के तहत जारी यह नोटिस कोलकाता के कालिघाट रोड स्थित प्रॉपर्टी नंबर 121, वार्ड 073 से संबंधित है। नगर निगम का आरोप है कि भवन के कुछ हिस्सों का निर्माण स्वीकृत नक्शे या अनुमोदित योजना से अलग तरीके से किया गया है।
18 मई 2026 को जारी नोटिस में लता बॅनर्जी को निर्देश दिया गया है कि वह सात दिनों के भीतर कथित अवैध या विचलित निर्माण को स्वयं ध्वस्त करें या फिर यह बताएं कि उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों न की जाए।
नोटिस में कहा गया है कि यह निर्माण कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। दस्तावेज में लिखा गया है, “आपको कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1980 की धारा 400(1) के तहत निर्देशित किया जाता है कि नोटिस प्राप्त होने की तारीख से सात दिनों के भीतर भवन के विचलित और अनधिकृत हिस्सों को ध्वस्त करें या फिर एक सप्ताह के भीतर कारण बताएं कि ऐसी कार्रवाई क्यों न की जाए।”
नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो म्यूनिसिपल कमिश्नर की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि KMC को खुद निर्माण हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी, तो उस पर आने वाला पूरा खर्च भवन मालिक, कब्जाधारी या जिम्मेदार व्यक्ति से वसूला जा सकता है।
इसके अलावा KMC ने संबंधित पक्ष को भवन का वास्तविक निर्मित ढांचे का नक्शा, साथ ही संरचनात्मक विवरण जमा करने का निर्देश दिया है। इसमें लिफ्ट, एस्केलेटर जैसी सुविधाओं का विवरण भी शामिल करने को कहा गया है। यह सभी दस्तावेज नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर जमा करने होंगे।
दस्तावेज में कथित अनियमितताओं और नियम उल्लंघनों का विस्तृत विवरण एक संलग्नक के रूप में शामिल होने का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि नगर निगम की ओर से जारी यह नोटिस एक प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इसके तहत संबंधित पक्ष को अपना स्पष्टीकरण देने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाता है।
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