स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत को लेकर सवाल किए जाने पर अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि उसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो जाए। यदि किसी गतिविधि से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा होती है, तो पुलिस की ओर से संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिया जा सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
स्वतंत्र भारद्वाज की रिहाई की मांग को लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर कुछ हिंदू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन पर भी अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि जिसे प्रदर्शन करना है, वह जाकर करे। सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी परिस्थितियों पर नजर रखे। उन्होंने इस प्रदर्शन को लेकर किसी विशेष राजनीतिक टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि यह कोई ऐसी बड़ी बात नहीं है, जिस पर उनकी विशेष प्रतिक्रिया ली जाए।
शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली विश्वविद्यालय जाकर छात्रों को संबोधित करने के कार्यक्रम पर अखिलेश प्रसाद सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव होता है और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी चुनाव लड़ती है।
सहारनपुर में एक मस्जिद गिराए जाने के सवाल पर अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में सुना है कि कार्रवाई अदालत के फैसले के आधार पर हुई है। यदि यह न्यायालय का निर्णय है, तो उस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देने का कोई सवाल नहीं है।
