फरीदाबाद की संदिग्ध अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर जांच तेज़ हो गई है और अब एक नया गंभीर खुलासा सामने आया है। यह निजी अल्पसंख्यक संस्थान बिना UGC की 12(B) ग्रांट-स्टेटस के ही करोड़ों रुपए की अल्पसंख्यक छात्रवृत्तियाँ और केंद्रीय अनुदान प्राप्त करता रहा। विश्वविद्यालय पहले से ही पाकिस्तान-समर्थित जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल, कट्टरपंथी डॉक्टरों और दिल्ली के लाल किले के पास हुई घातक कार ब्लास्ट साजिश में अपने संबंधों को लेकर कठोर जांच के घेरे में है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी को UGC अधिनियम की धारा 12(B) के तहत वह मान्यता नहीं मिली थी, जो किसी संस्थान को सीधे केंद्रीय अनुदान लेने के योग्य बनाती है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (MoMA) और अन्य केंद्रीय योजनाओं के जरिए करोड़ों के छात्रवृत्ति लाभ मिलते रहे। वर्ष 2016 में MoMA के ज़रिए 10 करोड़ रुपए से अधिक की छात्रवृत्तियाँ अल-फलाह के छात्रों के लिए जारी हुईं, जबकि 2015 में लगभग 2,600 छात्रों के लिए 6 करोड़ रुपए मिले। AICTE ने भी जम्मू-कश्मीर के छात्रों हेतु 1.10 करोड़ की छात्रवृत्तियाँ जारी कीं। यही नहीं, 2011 में AICTE की MODROB योजना के तहत लैब मॉडर्नाइजेशन के लिए भी फंड जारी किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से चल रहे एक “व्हाइट-कॉलर टेरर इकोसिस्टम” को उजागर करने के बाद युनिवेर्सिटी जांच के घेरे में है।
1997 में धौज गांव में एक इंजीनियरिंग संस्थान के रूप में स्थापित अल-फलाह को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिला और 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे निजी विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। 2015 में इसे UGC की धारा 2(f) के तहत सामान्य मान्यता मिली, परंतु विश्वविद्यालय ने 12(B) स्टेटस के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया, यह तथ्य स्वयं UGC ने स्पष्ट किया।
रिपोर्टें बताती हैं कि विश्वविद्यालय ने वर्षों तक अपने अल्पसंख्यक दर्जे का सहारा लेकर हरियाणा सरकार के अनेक आदेशों को चुनौती दी और अधिकतर मामलों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) से राहत पाई। चाहे 2007 में गैर-अल्पसंख्यकों के लिए 40% सीट आरक्षण का विवाद रहा हो या दूसरी शिफ्ट डिप्लोमा कोर्स की अनुमति—NCMEI ने अक्सर राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज किया। यहां तक कि मेडिकल और रिसर्च सेंटर के लिए NOC में देरी पर आयोग ने सरकार को फटकार भी लगाई थी।
लेकिन आतंकवाद संबंधी खुलासों के बाद अल-फलाह की आर्थिक गतिविधियों पर जांच और कठोर हो गई है।विश्वविद्यालय पर NAAC मान्यता की फर्जी प्रस्तुति, UGC स्टेटस की गलत जानकारी और विद्यार्थियों को गुमराह कर भारी फीस वसूलने के आरोप पहले ही दर्ज हैं। 18 नवंबर 2025 को ED ने विश्वविद्यालय के संस्थापक और चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। ED की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि परिवार-सम्बद्ध कंपनियों के माध्यम से फर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई, और कुल 415 करोड़ से अधिक फीस धोखे से वसूली गई।
दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की दो FIR दर्ज की हैं, जबकि NAAC ने विश्वविद्यालय को भ्रामक दावों पर शो-कॉज़ नोटिस भेजा है। दूसरी ओर, अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा है कि गिरफ्तार डॉक्टरों का विश्वविद्यालय से संबंध “सिर्फ पेशेवर भूमिकाओं तक सीमित” था और संस्था जांच में पूरी तरह सहयोग कर रही है।
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