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राहुल गांधी के खिलाफ FIR के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

सुनवाई के बाद होगा फैसला

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े आरोपों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए FIR दर्ज कराने के अपने पूर्व निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि किसी भी आपराधिक कार्यवाही से पहले राहुल गांधी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बिना संबंधित पक्ष को सुने सीधे FIR दर्ज कराने का निर्देश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने अपने 17 अप्रैल के आदेश में लखनऊ के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) के उस फैसले को पहले निरस्त किया था, जिसमें जनवरी में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने से इनकार किया गया था।

हालांकि, बाद में अदालत ने 2014 के एक महत्वपूर्ण जगन्नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य फैसले का हवाला देते हुए अपने आदेश पर पुनर्विचार किया। इस फैसले के अनुसार, धारा 156(3) CRPC के तहत किसी आवेदन को खारिज करने का आदेश अंतरिम (इंटरलोक्यूटरी) नहीं माना जाता और इसे आपराधिक पुनरीक्षण (क्रिमिनल रिवीजन) के तहत चुनौती दी जा सकती है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां किसी व्यक्ति के खिलाफ संभावित आपराधिक कार्यवाही हो सकती है, उसे अंतिम निर्णय से पहले अपना पक्ष रखने का अधिकार है। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और उनके वकीलों ने यह तर्क दिया था कि प्रस्तावित आरोपी को नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन उपलब्ध कानूनी स्थिति को देखते हुए अदालत ने माना कि बिना नोटिस दिए इस आवेदन पर फैसला करना उचित नहीं होगा।

अदालत ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि इस आवेदन का निपटारा संबंधित पक्ष को नोटिस दिए बिना नहीं किया जाना चाहिए। सभी पक्षों को इस मुद्दे पर अदालत के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।”

इसके बाद हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल को एक संशोधित आदेश जारी करते हुए अपने पहले के निर्देश को स्थगित कर दिया।अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया जाना चाहिए या नहीं।

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