केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यमुना नदी की सफाई, दिल्ली की सीवेज प्रणाली और पेयजल आपूर्ति के मुद्दों पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में गृह मंत्री ने यमुना को सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बताते हुए इसके संरक्षण और सफाई को केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में बताया।
अमित शाह ने 32 रियल-टाइम जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि 10 स्टेशन यमुना नदी पर, जबकि शेष 22 निगरानी स्टेशन उन प्रमुख नालों पर स्थापित किए जाएं जो सीधे नदी में गिरते हैं। इन स्टेशनों का उद्देश्य जल की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखना है। प्रमुख निगरानी स्थलों में ओखला बैराज, आईटीओ ब्रिज, पल्ला, आईएसबीटी ब्रिज और निजामुद्दीन ब्रिज जैसे स्थान शामिल हैं।
इस बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह सचिव, जल शक्ति मंत्रालय और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव सहित केंद्र और राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
गृह मंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय को देशभर के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें ट्रीटमेंट की गुणवत्ता, रखरखाव और जल के निर्वहन के लिए सटीक मानदंड निर्धारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह एसओपी अन्य राज्यों के साथ भी साझा की जानी चाहिए, ताकि जलप्रबंधन में एकरूपता आ सके।
अमित शाह ने कहा कि यमुना की सफाई, जल निकासी और पेयजल आपूर्ति के लिए 20 साल के विजन के साथ योजना बनानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली जल बोर्ड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और इसके रिक्त पदों को तुरंत भरने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल बोर्ड को पाइपलाइन लीकेज रोकने, जल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और गाद निकालने के लिए विश्व स्तरीय तकनीक अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने जल संरक्षण और प्रबंधन को स्थायी समाधान के रूप में अपनाने पर बल दिया।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दिल्ली जैसे महानगर में पेयजल आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने के लिए एक प्रभावी और दीर्घकालिक रणनीति आवश्यक है। गृह मंत्री ने जल वितरण में सुधार और लीकेज कम करने के लिए उन्नत तकनीक के उपयोग की वकालत की।
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