आसाम में अतिक्रमण विरोधी अभियान तेज: श्रीभूमि जिले में 660 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त

220 हेक्टेयर और शेष

आसाम में अतिक्रमण विरोधी अभियान तेज: श्रीभूमि जिले में 660 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त

Anti-encroachment drive intensifies ina Assam: 660 hectares of forest land in Sribhumi district freed from encroachment

आसाम में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे निरंतर अभियान के तहत राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रीभूमि जिले में दो दिनों के भीतर 660 हेक्टेयर वन भूमि को मुक्त करा लिया है। यह जानकारी सोमवार (9 फरवरी) को आसाम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद साझा की। उन्होंने बताया कि अभी 220 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना बाकी है और अभियान लगातार जारी है।

मुख्यमंत्री ने इस संबंध में एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “पिछले 2 दिनों में श्रीभूमि में 660 हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई गई, 220 हेक्टेयर और साफ किया जाना बाकी है। अथक अभियान जारी है।” साझा वीडियो में बेदखली अभियान के दृश्य दिखाए गए, जिसकी पृष्ठभूमि में भाजपा सांसद और गायक मनोज तिवारी का गीत चल रहा था।

इससे एक दिन पहले, 8 फरवरी (रविवार) को प्रशासन ने पाथरकांडी विधानसभा क्षेत्र के आरक्षित वनों में अवैध बस्तियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य 12,000 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमित वन भूमि को पुनः हासिल करना है। इस क्रम में 2,000 से अधिक घरों को बेदखली नोटिस जारी किए गए।

ईशरपार, माधबपुर, बलिया, मधुरबोंड, चागलमोया, मगुरा और जोगीसोरा सहित कई गांवों में नोटिस चस्पा किए गए, जिनमें अवैध रूप से रह रहे लोगों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर वन भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए है। नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों ने अपने घरों को स्वयं गिराना शुरू किया और क्षेत्र छोड़ दिया।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ जिला एवं वन अधिकारी मौके पर तैनात हैं। उनके साथ पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। प्रशासन अब शेष बस्तियों से अतिक्रमण हटाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि कई लोग पहले ही अपने घर खाली कर चुके हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, लक्ष्य अवैध मकानों, अस्थायी ढांचों और उगी हुई झाड़ियों को हटाकर इलाके को उसकी मूल वन अवस्था में बहाल करना है। कठिन भूभाग में काम को आसान बनाने के लिए हाथियों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही जेसीबी और एक्सकेवेटर सहित 50 से अधिक भारी मशीनें तैनात की गई हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने और अभियान की निगरानी के लिए वन और पुलिस विभाग के अतिरिक्त अधिकारियों को भी लगाया गया है।

पाथरकांडी के जिन आरक्षित वन क्षेत्रों में यह कार्रवाई चल रही है, उनमें मधुरबन, नारायणपुर, चागलमोवा, माधबपुर, बादशाही और दोहालिया शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल वनों के पुनर्वास और भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए चल रहे सतत कार्यक्रम का हिस्सा है।

बता दें की बीते दिनों राज्य के हैलाकांडी जिले में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई थी। 3 फरवरी को मुख्यमंत्री सरमा ने जानकारी दी थी की, “हैलाकांडी में 912 एकड़ भूमि मुक्त कराई गई है, जो IIT गुवाहाटी के परिसर से भी बड़ी है। कल से हमारे बुलडोज़र आगे बढ़े और हमने अतिक्रमणकारियों से अपनी जमीन का हर इंच वापस लेने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह हमारे अस्तित्व का सवाल है और हम विजयी होकर उभरेंगे।”

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