विधानसभा में वक्तव्य देते हुए राहुल नार्वेकर ने कहा कि उन्हें दिए गए शोक प्रस्ताव के पाठ में कुछ तकनीकी और मुद्रण संबंधी त्रुटियां थीं, जो पढ़ते समय अनजाने में उनके द्वारा भी पढ़ दी गईं। उन्होंने बताया कि कुल 12 शोक प्रस्ताव थे और उन्हें जो प्रिंटआउट दिया गया था, उसकी छपाई धुंधली थी, फॉन्ट का आकार बहुत छोटा था तथा उसमें कुछ तकनीकी खामियां भी थीं।
उन्होंने कहा, “मुझे मराठी भाषा पर गर्व है और मैं उसका सम्मान करता हूं। पिछले चार वर्षों में विधानसभा अध्यक्ष के रूप में मैंने मराठी में अनेक भाषण दिए हैं और सदन की कार्यवाही का सफलतापूर्वक संचालन किया है। कोई भी व्यक्ति, विशेषकर विधानसभा अध्यक्ष, महान गायिका आशा ताई भोसले जैसी विभूति का अपमान करने की कल्पना भी नहीं कर सकता। जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह अनजाने में हुई गलती थी। फिर भी यदि राज्य के नागरिकों या सदन के सदस्यों की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूं।”
विवाद सोमवार को उस समय शुरू हुआ था जब नरवेकर दिवंगत पार्श्व गायिका आशा भोसले और राजनीतिक विचारक दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ रहे थे। इस दौरान उन्होंने मराठी पाठ पढ़ते समय कई उच्चारण संबंधी और तथ्यात्मक गलतियां कर दीं। सबसे अधिक चर्चा उस वक्त हुई जब उन्होंने आशा भोसले के पिता और महान संगीतज्ञ दीनानाथ मंगेशकर का नाम गलती से “दीनदयाल मंगेशकर” पढ़ दिया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इतने गंभीर अवसर पर भाषा की ऐसी दुर्दशा दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा था मानो स्पीकर को दिया गया कागज पहले किसी ने भेल खाने के लिए इस्तेमाल कर लिया हो।
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने यह मुद्दा उठाया। शिवसेना (यूबीटी) विधायक अजय चौधरी ने इस मामले की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए कहा कि स्पीकर को गलत और त्रुटिपूर्ण पाठ उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इससे विधानसभा की गरिमा और अध्यक्ष की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।



