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Thursday, October 22, 2026
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पाकिस्तान में एनजीओ पर पाबंदी, मानवाधिकार संगठनों ने बताया लोकतांत्रिक पतन!

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने पंजाब प्रांत में नागरिक संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर चिंता जताई है।

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पाकिस्तान के ह्यूमन राइट्स कमीशन (एचआरसीपी) ने पंजाब प्रांत में आम लोगों की आवाज को दबाने और अधिकारों की बात करने वाले नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (एनजीओ) यानी स्वयं सेवी संस्थाओं पर लगाई पाबंदियों पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का लक्षण करार दिया है।

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने पंजाब प्रांत में नागरिक संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर चिंता जताई है।

एचआरसीपी की रिपोर्ट ‘रेगुलेशन ऑर रेस्ट्रिक्शन?’ में कहा गया है कि पाकिस्तान में नागरिक संगठनों को “अधिकारीवादी ड्रिफ्ट” (सत्तावादी सोच) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले के रूप में देखा जाता है, लेकिन सरकार ने उनके काम को कमजोर करने के लिए प्रतिबंधात्मक कानून और नीतियां बनाई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनजीओ को पंजीकरण के लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ती है, जिसमें पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के विभाग (ईएडी) के साथ समझौता ज्ञापन, जिला स्तर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र और सुरक्षा मंजूरी शामिल है। इससे एनजीओ के काम में बाधा आती है और उनके कार्यक्रमों को निलंबित या बंद किया जा रहा है।

इसमें आगे कहा गया, “इन जरूरतों को प्रोविंशियल चैरिटी कमीशन के तहत जरूरी री-रजिस्ट्रेशन से और मुश्किल बना दिया गया है। इससे न सिर्फ एनजीओ के काम करने के पैमाने और दायरे में रुकावट आई है, बल्कि ह्यूमन राइट्स और लोकतंत्र पर जरूरी प्रोग्राम भी सस्पेंड या बंद हो गए हैं। हालांकि कोर्ट ने बीच-बीच में राहत दी है, खासकर 2022 ईएडी पॉलिसी को रद्द करके, लेकिन एक सही, अधिकारों के हिसाब से चलने वाले कानूनी ढांचे की कमी ने प्रशासनिक दखल को जारी रखा है।”

शुक्रवार को रिपोर्ट के नतीजों पर चर्चा के लिए हुए एक सेमिनार में एचआरसीपी सदस्य जीशान नोएल ने कहा कि दिख रहा है कि पाकिस्तान “धीरे-धीरे लोकतांत्रिक पतन” की ओर बढ़ रहा है।

लाहौर और मुल्तान में हुई बैठकों के दौरान एचआरसीपी ने बताया कि महिलाओं के नेतृत्व वाले संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। इन समूहों को न केवल सरकारी संस्थाओं से बल्कि गैसरसरकारी तत्वों या चरमपंथी समूहों से भी धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

एचआरसीपी ने पाकिस्तानी सरकार से एनजीओ के लिए तेजी से और सुलभ कानूनी उपाय प्रदान करने, न्यायिक निगरानी बढ़ाने, और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

 
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