कांग्रेस सांसद और संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि बांग्लादेश में बढ़ता भीड़तंत्र, असहिष्णुता और हिंसा लोकतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की कथित लिंचिंग की घटना के बाद सामने आई है।
दरअसल 18 दिसंबर की शाम बांग्लादेश में फैक्ट्री में काम करने वाले दीपूचंद्र दास पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए जिहादी भीड़ ने जानलेवा हमला किया। पीड़ित को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला, उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि ऐसी हिंसा को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस तरह का भीड़तंत्र हावी नहीं होना चाहिए। जिस तरह से वहां हालात जा रहे हैं, वह बहुत चिंताजनक है। ऐसी स्थिति दोनों देशों के लिए अच्छी नहीं है; हम वहां शांति चाहते हैं।”
#WATCH | Patna, Bihar: On the situation in Bangladesh, Congress MP Shashi Tharoor says, "Such mob rule should not prevail. The Parliamentary Standing Committee has also said that we want good relations with Bangladesh, and peace should be maintained there. Elections are also… pic.twitter.com/VB2xWAGr4m
— ANI (@ANI) December 20, 2025
शशि थरूर ने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में शांति और स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति पहले भी जोर दे चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं और उससे पहले लोकतांत्रिक सामान्य स्थिति की बहाली बेहद जरूरी है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में थरूर ने बांग्लादेश से आ रही रिपोर्ट्स पर “गहरी चिंता” जताई। उन्होंने खासतौर पर प्रमुख समाचार पत्रों प्रथम आलो और द डेली स्टार के दफ्तरों पर हुए हमलों और आगजनी की घटनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह केवल दो मीडिया संस्थानों पर हमला नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और बहुलतावादी समाज की बुनियाद पर सीधा प्रहार है। उन्होंने पत्रकारों, विशेषकर वरिष्ठ पत्रकार महफूज अनाम की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि पत्रकारों को अपने जीवन के भय में काम नहीं करना चाहिए।
थरूर ने यह भी रेखांकित किया कि सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण खुलना और राजशाही में भारतीय सहायक उच्चायोगों में वीज़ा सेवाओं को निलंबित करना पड़ा, जिससे छात्रों, मरीजों और परिवारों पर सीधा असर पड़ा है और सीमापार सामान्य आवाजाही बाधित हुई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनावों से पहले हिंसा और असहिष्णुता का माहौल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए शुभ संकेत नहीं है। थरूर ने अंतरिम सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा, कूटनीतिक प्रतिष्ठानों की हिफाजत और संवाद के जरिए शांति बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस को स्वयं आगे आकर भीड़तंत्र रोकने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।
संसदीय समिति की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकती है। समिति ने राजनीतिक बदलावों, इस्लामवादी ताकतों की वापसी और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को क्षेत्रीय संतुलन के लिए अहम मोड़ बताया है। अंत में थरूर ने जोर देकर कहा कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए बांग्लादेश में शांति अनिवार्य है और जनता की आवाज हिंसा नहीं, बल्कि मतपत्र के जरिए सामने आनी चाहिए।
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