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बंगाल जाति प्रमाणपत्र री-वेरिफिकेशन माकपा-माले कानूनी चुनौती हाईकोर्ट PIL दायर!

पार्टी की ओर से दायर इस याचिका में राज्य सचिव अभिजीत मजूमदार और राज्य समिति सदस्य मलय तिवारी याचिकाकर्ता हैं।

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माकपा (माले) लिबरेशन ने पश्चिम बंगाल में पिछले 15 वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए जारी सभी जाति प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन (री-वेरिफिकेशन) के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है।

पार्टी की ओर से दायर इस याचिका में राज्य सचिव अभिजीत मजूमदार और राज्य समिति सदस्य मलय तिवारी याचिकाकर्ता हैं।

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मताधिकार छीनने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब भाजपा सरकार आरक्षण के अधिकारों को खत्म करने के लिए एक नया “एसआईआर” लागू करना चाहती है।

पार्टी का कहना है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्रों की जांच और सतर्कता की मौजूदा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के बजाय वास्तविक एससी-एसटी और ओबीसी नागरिकों को पूछताछ और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

बयान में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के जरिए दलित, आदिवासी और बहुजन समुदाय की नई पीढ़ी की पहचान तथा उससे जुड़े संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

सीपीआई(एमएल) ने यह भी आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने या न होने को जाति प्रमाणपत्र के सत्यापन से जोड़ना पूरी तरह अवैध है।

पार्टी ने कहा कि उसने दलित, आदिवासी और बहुजन समुदाय के हितों की रक्षा के लिए यह कानूनी लड़ाई शुरू की है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। साथ ही, पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने समाज के सभी स्तरों पर व्यापक जन अभियान और आंदोलन खड़ा कर इन अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया है।

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