शशांत का परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है| उनके दादा चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद शशांत ने एक स्टार्टअप से करियर शुरू किया और बाद में सैमसंग कंपनी के साथ काम किया, लेकिन राजनीति से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा।
साल 2022 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने पटना साहिब के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू किया। उनका दावा है कि “आपका बेटा आपके द्वार” अभियान के तहत वे 80 हजार से अधिक घरों का दौरा कर चुके हैं और लोगों के सुझावों के आधार पर 5 साल का विकास रोडमैप तैयार किया है।
वित्तीय स्थिरता के लिए उन्होंने खुशरुपुर (बख्तियारपुर के पास) एक डेयरी फार्म शुरू किया, जिसमें लगभग 80 गायें हैं। इससे न केवल उन्हें आय का स्रोत मिला, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त हुआ।
शशांत का मानना है कि पटना साहिब की राजनीति अब जाति नहीं, मुद्दों पर केंद्रित होगी। उनका कहना है| “2025 का चुनाव अलग होगा, लोग अब प्रदर्शन और योग्यता पर वोट देंगे।” कांग्रेस इस बार नए विचारों और युवा नेतृत्व के सहारे चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश में है।
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