बिहार की राजधानी पटना में महागठबंधन की आज बड़ी बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन समय आते-आते इसका आकार छोटा नजर आने लगा। दिल्ली में दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ राष्ट्रीय जनता दल की ओर से तेजस्वी यादव की बातचीत हुई। उस बैठक में वामपंथी दलों को नहीं बुलाया गया था।
आज पटना में बैठक हुई तो वामपंथ के बड़े चेहरे गैरहाजिर थे। कांग्रेस से कोई बड़ा चेहरा नहीं आया। मतलब, प्रदेश स्तर के नेता ही आए। विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी आए, लेकिन राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति कुमार पारस को बुलावा भी नहीं मिला।
तो, सवाल उठता है कि माना क्या जाए? बात यही रह गई कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह महागठबंधन के आधार दलों की एक सामान्य बैठक भर है। ऐसी बैठक, जिसमें न तेजस्वी यादव के सीएम चेहरे पर मुहर लगेगी और न सीटों के बंटवारे का कोई खाका तय होगा।
महागठबंधन की बैठक में विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी को बुलावा मिला, लेकिन राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख पशुपति कुमार पारस को न्यौता तक नहीं मिला। सहनी के पास बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में मंत्री पद का अनुभव है, जबकि पारस तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
इसके बावजूद यह क्यों? इस सवाल का जवाब यही है कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पारस ने अचानक एनडीए को छोड़ महागठबंधन का रुख एक जरूरतमंद के रूप में किया था, जबकि मुकेश सहनी एनडीए से चोट खाने के बाद तेजस्वी यादव से बेहद करीब आ गए थे। लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के साथ वह साये के रूप में थे। इसलिए, वह महागठबंधन की पटना बैठक में बुलाए गए।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। कांग्रेस के लिए निर्दलीय सांसद पप्पू यादव 100 सीटें मांग रहे हैं। निर्दलीय होकर भी वह यह मांग कर रहे हैं, क्योंकि वह बाहरी तौर पर कांग्रेसी हैं अब। खैर, कांग्रेस अबतक 70 की मांग पर अटकी है। वह मांग है, अभी जिद नहीं।
इधर, विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने महागठबंधन की इस बैठक से पहले अपनी पार्टी के लिए 60 सीटों की बात कही थी। लेकिन, अब महागठबंधन के मंच पर वह इसका 10 प्रतिशत भी दावा कर सकेंगे- उम्मीद कम है। ऐसे में महागठबंधन की आज हो रही बैठक कुल मिलाकर आपसी समन्वय पर ही केंद्रित होकर रह जाएगी, यह भी एक तरह से पक्का है।
सीटों का बंटवारा होना तो अभी असंभव है। रही बात तेजस्वी यादव के चेहरे पर बात करने की तो इस बैठक में मौजूद रहे नेता लोकसभा चुनाव भी उसी चेहरे पर लड़ चुके हैं, इसलिए यह सब कह सकते हैं कि नेतृत्व तेजस्वी करेंगे। मुख्यमंत्री का चेहरा तेजस्वी होंगे, ऐसा एलान कोई बड़ा नेता तो करने से रहा।
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