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Sunday, January 4, 2026
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‘जी हुजूर’ टिप्पणी पर भाजपा का हमला, राहुल गांधी को बताया अपरिपक्व नेता!

राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में ऑपरेशन सिंदूर व पीएम मोदी को लेकर बयान दिया था।​पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर जी हुजूर करके सीजफायर कर दिया।  उनके इस बयान पर भाजपा ने पलटवार किया।

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भारतीय सेना के सफल ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है। यह विवाद तब गहराया जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि भारत-पाक संघर्ष के समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप पर प्रधानमंत्री मोदी ने “जी हुजूर” कहकर सीजफायर कर दिया, जो भाजपा को नागवार गुज़रा।
 
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया:​ भाजपा ने राहुल गांधी के इस बयान को सेना के अपमान से जोड़ते हुए आक्रामक प्रतिक्रिया दी।​ राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने संसद में कहा कि राहुल गांधी का बयान “घटिया, बचकाना और असंवेदनशील” है।​ उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि विपक्ष के नेता बनने के बाद भी राहुल में वह गंभीरता और परिपक्वता नहीं है जो इस पद के लिए आवश्यक है।

‘सरेंडर’ टिप्पणी पर भाजपा का हमला:​ त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा​ “राहुल गांधी ने सेना के वीरता भरे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आत्मसमर्पण जैसा बताया है, जो बेहद खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है।”​ उन्होंने यह भी कहा कि​ “भारत के इतिहास में सरेंडर कांग्रेस ने किए हैं, भारत नहीं।”​ “राहुल गांधी और उनका खानदान सरेंडर की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।”

ऐतिहासिक संदर्भ और आरोप:​ भाजपा नेता ने कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर तीखे आरोप लगाए​ और उन्होंने कहा कि 2011​ में राहुल गांधी का बयान​, “आतंकवाद को पूरी तरह रोकना असंभव है”​| त्रिवेदी ने इसे भी आत्मसमर्पण बताया।​ 26/11 हमलों के बाद​ यूपीए सरकार का रुख पाकिस्तान के प्रति नरम​ रुख एक और आत्मसमर्पण का उदाहरण।​ 1971 युद्ध के बाद पीओके पर अधिकार न करना ​- कांग्रेस की ऐतिहासिक भूल करार दी।

भारतीय सेना की भूमिका और रक्षा:​ त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि​ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की घोषणा सेना द्वारा की गई थी, भाजपा द्वारा नहीं।​ राहुल गांधी का इस ऑपरेशन की तुलना आत्मसमर्पण से करना सेना के पराक्रम और बलिदान का सीधा अपमान है।

सुधांशु त्रिवेदी ने याद दिलाया कि राहुल ने एक बार कहा था:​ “यूरोप और अमेरिका भारत में लोकतंत्र की रक्षा के लिए हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहे?”​ भाजपा नेता ने इसे भी आत्मसम्मान के बजाय विदेशी ताकतों से गुहार और आत्मसमर्पण की मानसिकता बताया।

विपक्षी नेता के बयान से गहरी असहमति:​ त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी के बयान पाकिस्तान समर्थक तत्वों तक ने नहीं दिए, और जो बातें पाकिस्तान के आतंकी भी नहीं कह सके, वो राहुल गांधी ने बोल दीं ​- यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

राहुल गांधी की सफाई और कांग्रेस का पक्ष:​ राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा​ “1971 में इंदिरा गांधी ने अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ा।”​ “कांग्रेस पार्टी सरेंडर नहीं करती। गांधी, नेहरू और पटेल सुपरपावर से टकराने वाले नेता थे, झुकने वाले नहीं।”​ “भाजपा और आरएसएस पर थोड़ा दबाव पड़ते ही ये पीछे हट जाते हैं।”

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि​ भाजपा सेना की प्रतिष्ठा की रक्षा के नाम पर राहुल गांधी को घेर रही है।​ कांग्रेस अपने नेताओं के इतिहास और वैचारिक ताकत का हवाला देकर भाजपा की आलोचना कर रही है।​ संसद के अंदर और बाहर यह मुद्दा राजनीतिक ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद की नई बहस को जन्म दे रहा है।

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