कर्नाटक भाजपा के महासचिव पी. राजीव ने राज्य निर्वाचन आयोग के हालिया फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग ने सभी स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने का निर्देश दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजीव ने कहा कि जब पूरी दुनिया तकनीक को अपना रही है, तब कर्नाटक सरकार का बैलेट पेपर की ओर लौटना निंदनीय और पिछड़ेपन की निशानी है।
राजीव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर स्थानीय संस्थाओं को फिसड्डी बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने गृह मंत्री जी. परमेश्वर के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि बैलेट पेपर के जरिए राजनीतिक दल अक्सर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। भाजपा नेता के मुताबिक कांग्रेस ने 60 साल तक केंद्र की सत्ता पर काबिज रहते हुए बैलेट पेपर का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए किया, जिससे उनकी राजनीतिक नैतिकता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार को डर है कि ईवीएम के जरिए भाजपा को फायदा हो सकता है। राजीव ने कहा कि यदि ऐसा है तो राज्य सरकार जांच एजेंसियों के माध्यम से इसकी जांच कराए। “अगर जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उसे सुधारना चाहिए, लेकिन सरकार ने बिना किसी जांच के सीधे बैलेट पेपर को थोप दिया है,” उन्होंने कहा।
मुडा प्रकरण पर भी पी. राजीव ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सीएम सिद्धारमैया ने लोकायुक्त को कमजोर कर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का गठन किया, जिसमें अधिकारियों की नियुक्ति खुद मुख्यमंत्री ने की। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि SIT और आयोग ने मिलकर मुख्यमंत्री को बचाने का काम किया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में करोड़ों रुपये जब्त किए थे। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की।
राजीव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे हर सभा में संविधान की प्रति थमाते हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या नेताओं और आम जनता के लिए संविधान के अलग-अलग नियम हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ईडी का दुरुपयोग कर रही है, जबकि यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और इस पर किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए।
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