केंद्रीय बजट 2026 के बाद पेट्रोल और डीजल के नए रेट सामने आते ही आम लोगों के बीच राहत और उम्मीद का माहौल देखने को मिल रहा है। लंबे समय से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए ईंधन कीमतों में स्थिरता और संभावित कटौती को बजट का बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बजट भाषण में मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बढ़ावा देने की घोषणाओं के बाद माना जा रहा है कि सरकार ईंधन कीमतों को लेकर संतुलन की नीति अपना रही है।
तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नए दामों में कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मामूली राहत देखी गई है। भले ही यह कटौती बड़ी न हो, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से इसका असर व्यापक है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि ईंधन सस्ता या स्थिर रहने से भाड़े में बढ़ोतरी का दबाव कम होगा, जिससे आम उपभोक्ता को सीधा फायदा मिलेगा।
बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सपोर्ट और औद्योगिक उत्पादन पर खास जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार टैक्स स्ट्रक्चर और ड्यूटी में संतुलन बनाए रखती है, तो आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों में और राहत संभव है। छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए यह संकेत खास तौर पर उत्साहजनक है, क्योंकि डीज़ल की कीमतें सीधे खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी होती हैं।
हालांकि अर्थशास्त्री यह भी आगाह कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात ईंधन रेट पर निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अगर वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी, तो राहत अस्थायी साबित हो सकती है।
इसके बावजूद, बजट 2026 के बाद पेट्रोल-डीजल के नए रेट ने फिलहाल जनता को यह भरोसा जरूर दिया है कि सरकार महंगाई पर लगाम लगाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।
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