इस मामले में सुनवाई 17 अगस्त को ही पूरी हो चुकी थी। जस्टिस सुव्रा घोष ने फैसला सुरक्षित रख लिया था लेकिन बुधवार को उन्होंने गंभीर वजह बताते हुए खुद को इस मामले से अलग करने का ऐलान कर दिया।
जस्टिस सुव्रा घोष ने बताया कि मंगलवार को पूर्व मंत्री के एक वकील उनके चैंबर में आए थे, जब वह वहां मौजूद नहीं थीं। वकील ने उनके पर्सनल सेक्रेटरी से कहा कि चैंबर से केस से जुड़ी एक फाइल उन्हें दे दी जाए।
जस्टिस के मुताबिक यह पूरी घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। इसके बाद उन्होंने इस बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती को जानकारी दी। इसके बाद ही उन्होंने खुद को केस से अलग करने का फैसला लिया।
अब यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास लंबित है। वही तय करेंगे कि इसे अब किस नई बेंच को भेजा जाएगा। सुजीत बोस पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक और तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन सेवा मंत्री रह चुके हैं। ईडी ने उनके खिलाफ नगर पालिका नौकरी घोटाले के सिलसिले में मामला दर्ज किया है।
ईडी के अधिकारियों ने उन्हें इस साल 11 मई को गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने अपनी जमानत याचिका जस्टिस सुव्रा घोष की सिंगल बेंच में लगाई थी।
ईडी का आरोप है कि सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगर पालिका में नौकरी के इच्छुक लोगों के नामों की अवैध सिफारिश की थी। ट्रायल कोर्ट में ईडी ने पहले ही दावा किया था कि पूर्व मंत्री द्वारा सिफारिश किए गए लोगों की सूची में करीब 150 नौकरी चाहने वालों के नाम थे।
जांच एजेंसी ने यह भी कहा है कि भ्रष्टाचार से कमाई गई रकम सुजीत बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा की गई थी। गिरफ्तारी से पहले ईडी के अधिकारियों ने उनसे कई बार पूछताछ भी की थी।



