अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं के मामले में सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच मुख्यमंत्री पेमा खंडू के परिवार से जुड़े ठेकों को लेकर की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने CBI को नवंबर 2015 से 2025 के बीच दिए गए सार्वजनिक निर्माण ठेकों की जांच करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर एजेंसी इस अवधि से बाहर के लेनदेन की भी जांच कर सकती है।
यह आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि करीब ₹1,270 करोड़ के सरकारी ठेके मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े संस्थानों को नियमों को दरकिनार कर दिए गए।
जांच के दायरे में उन कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा, जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पत्नी, मां और भतीजे से जुड़ी हैं। याचिका में विशेष रूप से M/s ब्रांड ईगल्स का उल्लेख किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़ा बताया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के भतीजे और तवांग से विधायक त्सेरिंग ताशी की कंपनी M/s अलायन्स ट्रेडिंग कंपनी का भी जिक्र किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में दलील दी कि ठेके ऊंची दरों पर दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल यह निर्देश केवल इस बात का आकलन करने के लिए है कि क्या मामले में विस्तृत जांच की आवश्यकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं है।
CBI को 16 सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या इस मामले में पूर्ण जांच की जरूरत है। यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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