उत्तर भारत में फैले अवैध हथियार और गोला-बारूद तस्करी नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी(NIA) ने सोमवार (6 अप्रैल) को बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के नालंदा में 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई सुबह से ही शुरू हुई, जिसमें NIA की कई टीमें राज्य पुलिस के साथ मिलकर संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं।
यह मामला पिछले साल दर्ज किया गया था और जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बिहार से संचालित होकर उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैला हुआ है। एजेंसी के अनुसार, यह गिरोह हरियाणा के विभिन्न गन हाउस से अवैध रूप से गोला-बारूद जुटाता था, जिसे उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार और अन्य इलाकों में सप्लाई किया जाता था।
इस केस में NIA पहले ही कई अहम गिरफ्तारियां कर चुकी है। दिसंबर 2025 में एजेंसी ने इस नेटवर्क के मुख्य सरगना कमलकांत वर्मा उर्फ ‘अंकल जी’ को पटना से गिरफ्तार किया था, जो इस मामले का 11वां आरोपी था। जांच में उसकी भूमिका नेटवर्क के संचालन और सप्लाई चेन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण बताई गई है।
इससे पहले 4 दिसंबर 2025 को भी NIA ने उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में 23 स्थानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान रवि रंजन, शशि प्रकाश, विजय कालरा और कुश कालरा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और भारी मात्रा में हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किया गया था।
ताजा छापेमारी को इस नेटवर्क की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कई खुलासे हो सकते हैं।
इसी बीच, NIA की विशेष अदालत ने दो बांग्लादेशी नागरिकों राहुल उर्फ़ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन की हिरासत 9 दिन और बढ़ा दी है। दोनों को मार्च में पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था और बाद में ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया।
इन दोनों पर बांग्लादेश में राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या का आरोप है। जांच के अनुसार, वे मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और बोंगांव से उस समय पकड़े गए जब वे वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए उनकी हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया।
NIA की यह कार्रवाई न केवल एक बड़े आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि यह देश में अवैध हथियारों की तस्करी पर लगाम लगाने की कोशिशों को भी मजबूत करती है।
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