मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक निजी स्कूल में नर्सरी के विद्यार्थियों को ‘न से नमाज’, ‘म से मस्जिद’ और ‘क से काबा’ पढ़ाया जा रहा है। अभिभावक को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को सूचना दी। इसके बाद विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए वार्ड-2 स्थित बेबी कॉन्वेंट स्कूल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान कई अभिभावक भी मौजूद रहे। विरोध के बाद स्कूल की प्राचार्य ईए कुरैशी ने गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा कि यह पट्टी पहाड़ा भोपाल से मंगवाया गया था। इसकी केवल एक ही कॉपी थी।
जानकारी के अनुसार, स्कूल की नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के चाचा ने हिंदी पट्टी पहाड़े की किताब देखी तो उसमें ‘औ से औरत (हिजाब में)’ लिखा देखा। आगे पन्ने पलटने पर ‘क से कबूतर’ की जगह ‘क से काबा’, ‘म से मछली’ की जगह ‘म से मस्जिद’ और ‘न से नल’ की जगह ‘न से नमाज’ लिखा था।
इसके बाद परिजनों ने विद्यार्थी परिषद को इसकी जानकारी दी। विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक अश्विनी पटेल सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने स्कूल में पहुंचकर विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सनातन और हिंदुत्व के खिलाफ षड्यंत्र है, छोटे बच्चों को गलत शिक्षा दी जा रही है।
पटेल ने कहा, हमने बचपन में क से कबूतर और म से मछली पढ़ा था। इस पर प्राचार्य ने जवाब दिया कि ‘म से मंदिर’ के साथ ‘म से मस्जिद’ भी पढ़ाया जा सकता है, जिसके बाद कार्यकर्ता और आक्रोशित हो गए।
पार्टी नेता फराज आलम के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता देना है, ताकि बचपन से ही वे ज़िम्मेदार नागरिक बनें। ये स्कूल भाजपा सरकार द्वारा बंद किए गए सरकारी स्कूलों के विकल्प के रूप में शुरू किए गए हैं और पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) विचारधारा को बढ़ावा देते हैं।
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