आपराधिक जांच विभाग ने शनिवार (30 मई) को फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में अभिषेक बॅनर्जी को समन जारी किया। मामला उस पत्र से जुड़ा है जिसे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 19 मई को विधानसभा सचिवालय को भेजा था। इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में नामित किया गया था। आरोप है कि इस पत्र पर कुछ टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी थे।
अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा सचिवालय की ओर से बुधवार को कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामला सीआईडी को सौंप दिया गया।
सीआईडी के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार दोपहर बनर्जी को नोटिस दिया गया और उन्हें सोमवार दोपहर 12 बजे राज्य पुलिस मुख्यालय भवानी भवन में पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा गया है।
पुलिस के अनुसार, टीएमसी ने सबसे पहले 6 मई को सोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने संबंधी पत्र विधानसभा सचिवालय को भेजा था। हालांकि, यह पत्र टीएमसी विधायक दल की ओर से नहीं भेजा गया था, जबकि ऐसा होना अनिवार्य है। इसके बाद 19 मई को टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों वाला दूसरा पत्र प्रस्तुत किया गया। जांच में पाया गया कि उसमें मौजूद कुछ हस्ताक्षर विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सीआईडी की पांच सदस्यीय टीम दक्षिण कोलकाता स्थित हरीश मुखर्जी रोड पर शांतीनिकेतन भवन पहुंची। वहां मौजूद एक व्यक्ति, जिसने स्वयं को घरेलू कर्मचारी बताया, ने कहा कि अभिषेक बनर्जी घर पर नहीं हैं।
इसी दौरान बनर्जी बेलेघाटा से अपने कालीघाट रोड स्थित आवास लौटे। वह हाल ही में चुनाव बाद हुई हिंसा में कथित रूप से मारे गए टीएमसी कार्यकर्ता बिश्वजीत पटनायक के परिवार से मिलने गए थे। मीडिया से बातचीत में बनर्जी ने कहा, “मैं शांतीनिकेतन में नहीं रहता। यदि किसी को मुझसे मिलना है तो उसे यहां आना होगा। सीआईडी क्यों आई है, यह मुझे नहीं पता। अभी तक मुझे कोई नोटिस नहीं मिला था। यदि मुझे नोटिस दी जाएगी, तो मैं उसका कानूनी रूप से सामना करूंगा।”
इसके बाद सीआईडी टीम करीब एक घंटे तक शांतीनिकेतन भवन के पास इंतजार करती रही और फिर नोटिस देने के लिए बनर्जी के कालीघाट रोड स्थित आवास पहुंची।
नोटिस प्राप्त करने के बाद बनर्जी ने कहा, “मुझे नोटिस मिल गई है, लेकिन मैंने अभी इसकी सामग्री नहीं देखी है। मैं कानूनी सलाह लूंगा। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। इससे पहले मैं ED और CBI के साथ सहयोग कर चुका हूं और उनके समक्ष 10 से 12 बार पूछताछ के लिए उपस्थित हो चुका हूं। जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है।”
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