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Monday, June 1, 2026
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विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभाला!

घरेलू निवेशकों द्वारा लगाए गए इस बड़े निवेश ने विदेशी निवेशकों की 11 महीने से जारी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया।

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घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मई में भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा देते हुए रिकॉर्ड 82,668 करोड़ रुपए का निवेश किया। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार बिकवाली जारी रखी।

घरेलू निवेशकों द्वारा लगाए गए इस बड़े निवेश ने विदेशी निवेशकों की 11 महीने से जारी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। मई के दौरान एफआईआई ने कुल 55,963 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, लेकिन डीआईआई के मजबूत निवेश ने बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बनाए रखी।

महीने के दौरान निवेशकों के बीच यह खींचतान अंतिम सप्ताह के कारोबार में भी साफ दिखाई दी।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (टेक्निकल) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “एफआईआई ने अपनी बिकवाली जारी रखी और चार कारोबारी सत्रों में शुद्ध रूप से 23,734 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं डीआईआई ने बाजार के सबसे बड़े सहारे की भूमिका निभाते हुए 25,503 करोड़ रुपए की खरीदारी की। खास बात यह रही कि डीआईआई ने पूरे सप्ताह हर दिन लगातार खरीदारी की।”

विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बड़े पैमाने पर निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है।

इसके अलावा, रुपए में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों जैसे कई व्यापक आर्थिक दबावों ने भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

हालांकि, भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन घटनापूर्ण सप्ताह का सामना किया। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं को कम किया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।

इसके बावजूद, एफआईआई पूरे सप्ताह सतर्क बने रहे और अधिकांश समय शुद्ध बिकवाल (नेट सेलर) की भूमिका में रहे।

वहीं डीआईआई लगातार बाजार को स्थिरता प्रदान करने का काम करते रहे।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बड़े हिस्से को अपने भीतर समाहित कर लिया और बेंचमार्क सूचकांकों में ज्यादा गिरावट आने से रोका।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीने में संस्थागत निवेश का रुख अमेरिका-ईरान तनाव की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के फैसले और मानसून की प्रगति जैसे प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा।

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