प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि वे जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रहे और आंदोलन में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई। आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दिपके के करीबी और पहचान वाले लोगों को बुलाया गया जबकि आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन था। उनका दावा है कि जंतर मंतर आंदोलन से करीब 450 लोग कोऑर्डिनेटर के रूप में जुड़े थे लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया।
युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात तक पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से बैठक और आंदोलन को लेकर बातचीत होती रही लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे अभिजीत दिपके के घर के बाहर अनशन पर बैठेंगे और जब तक आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा।
सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा,”एक ग्रुप बनाया गया है और सभी इस बात से सहमत हैं कि अगर चीजें लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें, तो इससे देश का भला होगा। हमें आपके सामने यह बयान देने की जरूरत नहीं थी, हमें इसका बुरा लग रहा है। लेकिन जब तक हम आवाज नहीं उठाते, हमारी बात सुनी नहीं जाती।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “मेरा मकसद और वहां बैठे 100, 200 या 500 लोगों समेत हमारे सभी साथियों का मकसद साफ है। हर कोई पूछ रहा है कि फैसले सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग ही क्यों ले रहे हैं? अगर हम सच में लोकतंत्र में यकीन रखते हैं, तो फैसले लोकतांत्रिक तरीके से होने चाहिए।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “जो भी हो, उन्हें मीटिंग करने दें। जो लोग इसमें शामिल हुए, उन्हें समझना होगा, राहुल गांधी ने कल उन पांच लोगों को बुलाया जो आंदोलन से जुड़े अहम चेहरे थे। अब, ये हमारे आंदोलन के चेहरे हैं।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “जो भी हो, उन्हें बैठक करने दें। जो लोग इसमें शामिल हुए, उन्हें समझना होगा—राहुल गांधी ने कल उन पांच लोगों को बुलाया जो आंदोलन से जुड़े अहम चेहरे थे। अब, ये हमारे आंदोलन के चेहरे हैं।
सीजेपी कार्यकर्ता ने कहा , “हम यहीं बैठे हैं। हम तब तक यहीं बैठे रहेंगे जब तक टीम यह फैसला नहीं ले लेती कि सभी वॉलंटियर्स, बिना किसी भाई-भतीजावाद या पक्षपात के आंदोलन में शामिल हर राज्य के प्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए और फैसले लोकतांत्रिक तरीके से लिए जाएं।
