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Wednesday, June 3, 2026
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गोमाता अपमान पर सीएम योगी की चेतावनी, चेलों को समझाएं!

हम उन्हें बता दें कि गाय हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। माता-पुत्र के बीच कुछ भी घोषित करने की आवश्यकता नहीं।

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गाजियाबाद की घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक कहा कि दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी कतई स्वीकार्य नहीं है। जो अपनी नालायक औलाद को समझा नहीं पा रहा है, वह गलती कर रहा है। कुछ मौलवी-मौलाना बयान दे रहे हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करो।
हम उन्हें बता दें कि गाय हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। माता-पुत्र के बीच कुछ भी घोषित करने की आवश्यकता नहीं। किसी पुत्र को यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि मां का सम्मान करो। हम मां और गाय दोनों के प्रति एक जैसा सम्मान का भाव रखते हैं। पशुवत तुम्हारी बुद्धि व सोच है, जो हमारी गोमाता को पशु बोलते हो। यह तुम्हारा दोगलापन है, जो गोकशी को प्रश्रय देते हो।

सीएम योगी ने कड़ी चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर गोमाता का चित्र लगाकर बकरीद की बधाई देने वाले अपने चेलों को समझा लो कि गोमाता के साथ हिमाकत की तो ऐसी दुर्गति होगी कि कई पीढ़ियां याद करेंगी। यूपी में गोहत्या का मतलब तो तुम जान ही रहे हो। उन्होंने बिजनौर में कई परिवारों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी फैलाई। उन्होंने पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों एवं पूर्व सैनिकों/लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित किए।

महात्मा विदुर की पावन धरती बिजनौर को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महाभारत की धरती है। महाभारत से हमें प्रेरणा मिलती है कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। जो स्वार्थ के लिए धर्म को नष्ट करता है, धर्म उसे भी नष्ट कर डालता है। यह उद्घोषणा दुनिया में अक्षरशः साबित हो रही है। यह भारत के इतिहास को बनाने वाली धरा है। इसने इतिहास को बनते और बिगड़ते भी देखा है।

उन्होंने पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी विरासत को कुंवर सुशांत सिंह संभाल रहे हैं। पाकिस्तान से विस्थापित हजारों परिवारों, जिनकी पुश्तैनी संपत्ति पर पाकिस्तान की मजहबी कट्टरता ने 1946, 47 व 48 में जबरन कब्जा कर निर्दोष हिंदुओं व सिखों का कत्लेआम किया था।

वर्ष-दशक बीतते गए, आज चौथी पीढ़ी में यह अवसर आया है, जब हम विस्थापित परिवारों को जमीन पर मालिकाना हक दे रहे हैं। अभी 1645 विस्थापित परिवारों यानी 8-10 हजार लोगों को जमीन के कागज प्राप्त हो रहे हैं। जो शेष हैं, उनके लिए भी कार्यवाही चल रही है।

सीएम योगी ने कहा कि गोमाता राष्ट्रमाता हैं। इसी तरह हमारी मां गंगा के बारे में परिचय देने की आवश्यकता नहीं है। हम सब गंगा मां की आरती व पूजा करते हैं। अपने को गंगा पुत्र मानकर सम्मानित महसूस करते हैं। हमारे तीर्थ गंगा तट पर हैं, हमारे सभी संस्कार मां गंगा के तट पर संपन्न होते हैं। कोई आक्रांता हमें न बताए, हमारे संस्कार हैं कि हमने गाय व गंगा को माता माना है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मजहबी निर्ममता के शिकार बने विस्थापितों के बारे में मौलाना व मौलवी की कभी आवाज नहीं निकली। काश, वे बोलते कि इनकी संपत्ति को वहां कट्टरपंथियों ने हड़प लिया।

वक्फ के नाम पर यहां हिंदूओं की जमीनों पर कब्जा है। ये लोग इन संपत्तियों को विस्थापितों को फ्री में देने की घोषणा करते तो हम मानते कि इनकी भी कुछ संवेदना है। मुंह में कुछ और पीछे कुछ, यही दोगला चरित्र होता है।

सीएम योगी ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के कत्लेआम पर एक भी मौलवी-मौलाना ने कुछ नहीं कहा। बांग्लादेश में हिंदू 22 फीसदी से घटकर 7 और पाकिस्तान में 14 से घटकर महज 2 प्रतिशत रह गया।

मौलाना पाकिस्तान या बांग्लादेश की सरकारों की निंदा नहीं करते। ये मौलाना जुमे की नमाज में यही घोषणा कर देते कि पाकिस्तान भारत का दुश्मन है और घटिया स्तर पर काम कर रहा है। भारत के बहादुर जवान दुश्मन के ठिकाने पर जाकर उन्हें सबक सिखाने का ठीक काम कर रहे हैं, लेकिन किसी मौलवी-मौलाना ऐसा नहीं करते।

मुख्यमंत्री ने बकरीद पर होने वाली हरकतों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि गनीमत है कि सरकार ने पहले से ही कदम उठाए हैं, तब त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से हो पा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले रामनवमी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, कांवड़ यात्रा सपना हो गई थी। बेटी स्कूल नहीं जा पा रही थी, जबकि व्यापारी असुरक्षित था।

उन्होंने कहा कि हमारी संवेदना सामान्य नागरिकों के प्रति है। पीएम मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों से बिना मत-मजहब देखे समान रूप से सभी को शासन की योजनाओं का लाभ दिया गया। ऐसे में देश भी अपेक्षा करता है कि उनकी संवेदना दिखाई दे, लेकिन यह गायब है। अहिंसा और करुणा मानवता के भूषण हैं, किंतु शस्त्र उठाना होगा यदि सामने खर-दूषण हैं।

सीएम ने भगवान श्रीकृष्ण व श्रीराम का स्मरण कराते हुए कहा कि हम सज्जनों के लिए ही सज्जन बनें, दुर्जनों के लिए नहीं। श्रीराम का भी यही लक्ष्य था कि धरती को राक्षस विहीन कर देंगे। नागरिकों, गरीबों, बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों से लड़ना होगा। देश के खिलाफ द्रोह करने वालों के खिलाफ कठोरता व निर्ममता से लड़ने को तैयार होना होगा।

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