संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई 2025 से प्रारंभ हुआ है। सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है। पहले दिन पहलगाम आतंकी हमले को लेकर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया, और दूसरे दिन का मुद्दा बना बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण।
बुधवार को लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान, जब सदन में ‘बिहार में रेल परियोजनाएं’ विषय पर चर्चा चल रही थी, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे को उठाते हुए जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।
सदन में शोरगुल और अनुशासनहीनता देखकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नाराज़ हो गए। उन्होंने विपक्षी सांसदों को सख्त शब्दों में चेताते हुए कहा, “आप सड़क का व्यवहार संसद में कर रहे हैं। यह देश देख रहा है।”उन्होंने आगे कहा कि अगर सांसद तख्तियां लेकर सदन में आएंगे, तो उन्हें निर्णायक कार्रवाई करनी पड़ेगी।
“संसद हमारे गौरवशाली लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है। देश की जनता ने आपको चुनकर यहां भेजा है, ताकि आप उनकी आवाज़ बनें, उनकी समस्याओं को उठाएं, और राष्ट्रहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करें। इस सदन में मर्यादा और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक सांसद का कर्तव्य है।”
स्पीकर की चेतावनी के बाद भी सदन में शांति नहीं बन सकी, जिसके चलते उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। यह तीसरा दिन था जब सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई।
विपक्ष का आरोप है कि बिहार में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) में अनियमितताएं और पक्षपात हो रहा है, जिससे चुनावी निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं। इस मुद्दे को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक संघर्ष का विषय बनाया गया।
लोकसभा में विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों से स्पष्ट है कि संसद का यह मानसून सत्र काफी गर्म और टकरावपूर्ण रहने वाला है। लोकतंत्र के मंदिर में जहां सदन की मर्यादा अपेक्षित होती है, वहीं लगातार हो रहा हंगामा और नारेबाजी न केवल चर्चा को बाधित कर रही है, बल्कि संसदीय गरिमा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रही है।
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