बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को लेकर महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। इस बार कांग्रेस ने खुद को लचीला रुख अपनाते हुए सीटों की संख्या घटाने का संकेत दिया है। सूत्रों के अनुसार, 2020 में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस अब 50 के आसपास सीटों पर उतरने के लिए तैयार हो चुकी है।
कांग्रेस का यह निर्णय केवल वर्तमान चुनावी समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राजनीति का संकेत भी देता है। पार्टी नेतृत्व ने तय किया है कि इस बार वह बड़ा दिल दिखाकर अपने सहयोगियों को समायोजित करेगी। कांग्रेस 20 सीटें नए सहयोगी दलों – विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) – के लिए छोड़ने पर सहमत है। वहीं राजद भी अपनी तरफ से कुछ सीटें समर्पित कर साझेदारी सुनिश्चित करेगा।
कांग्रेस की रणनीति यह है कि कम सीटों पर लड़े लेकिन स्ट्राइक रेट बेहतर हो। पार्टी मानती है कि यह चुनाव उसके लिए लिटमस टेस्ट साबित होगा। अगर चुनी हुई सीटों पर कांग्रेस जीत का परचम लहराती है तो नतीजों के बाद वह भविष्य में महागठबंधन में अपनी अलग पहचान गढ़ सकती है।
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस वाम दलों को कम सीटों की पेशकश नहीं करना चाहती, क्योंकि उनका जीत प्रतिशत अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। इसलिए समायोजन की जिम्मेदारी राजद और कांग्रेस ने साझा की है।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने न तो मुख्यमंत्री पद की दावेदारी जताई है और न ही नेतृत्व को लेकर कोई रुचि दिखाई है। पार्टी का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तेजस्वी यादव ही ज्यादा सीटों और विधायकों की बदौलत सीएम फेस रहेंगे। इस प्रकार कांग्रेस का बड़ा दिल दिखाना रणनीतिक तौर पर महागठबंधन को मजबूती देने के साथ-साथ भविष्य की राजनीति के लिए दरवाजे खोलने जैसा है।
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