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Sunday, June 14, 2026
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बाहरी जोखिम घटे, वैश्विक झटकों से निपटने को भारत तैयार: नागेश्वरन!

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रुपए को संभालने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करने का दबाव पड़ने की संभावना भी कम है।

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भारत का बाहरी क्षेत्र (एक्सटर्नल सेक्टर) पहले की तुलना में काफी अधिक मजबूत हो गया है और देश की व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) बुनियाद अब वैश्विक झटकों का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है। यह बात मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कही।

एनडीटीवी इग्नाइट समिट में बोलते हुए नागेश्वरन ने कहा कि बाहरी क्षेत्र के सामने मौजूद जोखिमों में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रुपए को संभालने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करने का दबाव पड़ने की संभावना भी कम है।

उन्होंने कहा कि बाहरी मोर्चे पर सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट चुका है। हाल के वैश्विक संकटों के दौरान अपनाए गए विवेकपूर्ण आर्थिक प्रबंधन और समय पर किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों को उन्होंने इस बेहतर स्थिति का प्रमुख कारण बताया।

आरबीआई द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दिए गए 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान का समर्थन करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अब पहले की तुलना में कहीं अधिक नियंत्रण में है।

भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को लंबे समय तक लगभग 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है या कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती हैं, तो इसका आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है और विकास दर घटकर करीब 6 प्रतिशत तक आ सकती है।

रोजगार और तकनीक के विषय पर नागेश्वरन ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र के आसपास नए रोजगार अवसर पैदा करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसे कौशल विकसित करने पर ध्यान देना होगा जो एआई के साथ काम कर सकें और स्वचालन (ऑटोमेशन) के कारण होने वाले बदलावों से कम प्रभावित हों।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों ने निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है, जो निजी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र में सुधार के संकेत देता है।

इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था से विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है, और नागेश्वरन ने आगामी खरीफ सीजन को लेकर सकारात्मक रुख जताया।

उन्होंने कहा कि जलाशयों में बढ़ा हुआ जलस्तर और बेहतर बुवाई की स्थिति कृषि उत्पादन को समर्थन देगी, भले ही अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हों।

इस बीच, एआई के लिए तैयारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा कि भविष्य में एआई एक सामान्य तकनीक बन जाएगी और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए मजबूत प्रतिभा आधार, बड़े डेटा संसाधन, प्रगतिशील नीतियां और व्यापक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तैयार करनी होगी।

कांत ने एआई को एक ऐसी परिवर्तनकारी शक्ति बताया जो बिजली और कंप्यूटर के आगमन से भी अधिक बड़े स्तर पर उत्पादकता बढ़ा सकती है।

उन्होंने कहा, “यह अब तक की सबसे बड़ी क्रांति साबित होगी।” कांत के अनुसार, दुनिया एक तरफ भू-राजनीतिक संघर्षों और आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर एआई द्वारा संचालित अभूतपूर्व उत्पादकता वृद्धि के युग में प्रवेश कर रही है।

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