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Sunday, October 18, 2026
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पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से मांगी तारीख!

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ओमप्रकाश प्रजापति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।

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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा कि प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। अदालत ने आयोग को अगली सुनवाई पर चुनाव कार्यक्रम अथवा संभावित तिथि की जानकारी देने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को पंचायत चुनावों के लिए गठित अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट भी 10 जुलाई तक अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ओमप्रकाश प्रजापति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। मामला ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार द्वारा उन्हें संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। याचिका में इस व्यवस्था को संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों की भावना के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समयबद्ध तरीके से चुनाव कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त करना कानून की मंशा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण और अन्य प्रक्रियाओं के लिए ओबीसी आयोग का गठन किया है। सरकार का पक्ष था कि आयोग को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह माह का समय दिया गया है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हालांकि, खंडपीठ ने सरकार की इस दलील पर संतोष नहीं जताया और स्पष्ट किया कि मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि ओबीसी आयोग की प्रगति रिपोर्ट अथवा अंतिम रिपोर्ट अगली सुनवाई यानी 10 जुलाई को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी स्पष्ट जवाब मांगा है कि पंचायत चुनाव कराने की तैयारी किस चरण में है और चुनाव की संभावित समय-सीमा क्या होगी। कोर्ट के निर्देश के बाद अब आयोग और राज्य सरकार दोनों को चुनावी तैयारियों और आरक्षण संबंधी प्रक्रिया की स्थिति से न्यायालय को अवगत कराना होगा।

बता दें कि प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से संबंधित ग्राम प्रधानों को ही अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया था, जिसे लेकर यह जनहित याचिका दाखिल की गई है।

मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी, जिसमें पंचायत चुनावों की समय-सीमा और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

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