मध्य-पूर्व में ईरान के मिसाइल हमलों के बाद बढ़ते तनाव के बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया कि उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत बातचीत की और संकट के दौरान इज़राइल के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए भारत का आभार जताया।
सोमवार(2 मार्च) को मीडिया से बातचीत में नेतन्याहू ने मोदी को “ग्रेट फ्रेंड” बताया। यह टिप्पणी उस समय आई जब वे मध्य इज़राइल के शहर बेत शेमेश के दौरे पर थे, जहां एक ईरानी मिसाइल हमले में एक सिनेगॉग पर प्रहार हुआ था। इस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई और व्यापक नुकसान हुआ।
हमले की जगह पर मलबे के बीच सुरक्षा कर्मियों से घिरे नेतन्याहू ने कहा, “मैंने हमारे बहुत अच्छे दोस्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मैंने कल उनसे लंबी बात की और इज़राइल के साथ खड़े रहने, सच के लिए खड़े रहने और भारत के लोगों की गहरी दोस्ती के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।”
Benjamin Netanyahu (PM of Israel):
I spoke with my friend Prime Minister Narendra Modi. I thank him for standing with Israel during this hour of crisis. I also spoke with several other leaders.
🇮🇱 🇮🇳 🇮🇷 pic.twitter.com/8Ifm5j68B7— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) March 2, 2026
उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल में भारत के लोगों के प्रति गहरी प्रशंसा है। हालांकि उन्होंने बातचीत के विस्तृत विवरण साझा नहीं किए, लेकिन पुष्टि की कि क्षेत्रीय हालात के बीच वे अन्य वैश्विक नेताओं से भी संपर्क में हैं।
नेतन्याहू की टिप्पणी भारत और इज़राइल के बीच पिछले एक दशक में मजबूत हुए रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग बनाए हुए हैं। सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को लेकर भी दोनों सरकारें लगातार साझेदारी पर जोर देती रही हैं।
दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी करीबी संबंध माने जाते हैं, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
इससे पहले दिन में नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा संयुक्त सैन्य अभियान ईरान के भीतर राजनीतिक परिवर्तन की परिस्थितियां भी पैदा कर सकता है।
हमले वाली जगह पर खड़े होकर उन्होंने संकेत दिया कि ईरानी जनता के लिए अपनी नेतृत्व व्यवस्था को चुनौती देने का समय निकट हो सकता है। उन्होंने कहा, “वह दिन निकट आ रहा है। जब वह आएगा, तो इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी लोगों के साथ वहां होंगे, अंतिम निर्णय ईरानी जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।”
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानियों से का आह्वान किया था, की वह अपना देश वापस हाथ में लें।
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