दिल्ली सरकार राजधानी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को केवल आवास ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुविधायुक्त जीवन देने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि नववर्ष से गरीब परिवारों को उनके फ्लैट्स की चाबियां सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) की ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों में अधूरी पड़ी सुविधाओं को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ मकान बनाकर जिम्मेदारी निभाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गरीब और वंचित वर्ग को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल आपूर्ति, हरित क्षेत्र और रोजगार से जुड़ी सभी बुनियादी सुविधाएं एक साथ मिलें। सावदा घेवरा जैसी बड़ी ईडब्ल्यूएस कॉलोनियों का समग्र विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि सावदा घेवरा ईडब्ल्यूएस आवासीय कॉलोनी लगभग 37.81 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है, जहां 2012 से 2020 के बीच 7,620 आवासीय इकाइयों का निर्माण हुआ था। इनमें से 6,476 फ्लैट अभी खाली हैं और पूर्व सरकारों की उपेक्षा के कारण अधिकांश फ्लैटों को मरम्मत की जरूरत है। हालांकि कॉलोनी में 100 प्रतिशत सीवरेज नेटवर्क मौजूद है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कॉलोनी में 39 पार्क, जल आपूर्ति के लिए टैंक और बूस्टर स्टेशन, तथा ठोस कचरा प्रबंधन के लिए ढलाव बनाए गए हैं। कई सुविधाएं निर्माणाधीन हैं, जिनमें स्कूल, डिस्पेंसरी, शॉपिंग सेंटर और स्थानीय रोजगार से जुड़ा ढांचा शामिल है।
उन्होंने बताया कि 2,500 खाली फ्लैटों की मरम्मत के लिए 27.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। उम्मीद है कि अगले वर्ष से सुविधाओं से लैस फ्लैटों का आवंटन शुरू हो जाएगा, जबकि शेष फ्लैटों की मरम्मत अगले चरण में की जाएगी।
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