केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आइसलैंड यात्रा को ‘बहुत ही फलदायी और उत्पादक’ करार देते हुए कहा कि भारत और आइसलैंड, भले ही भौगोलिक रूप से दूर हों, लेकिन दोनों देश इनोवेशन, पर्यावरणीय स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा के प्रति समान दृष्टिकोण साझा करते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में पुरी ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान हुई प्रमुख बैठकों, तकनीकी चर्चाओं और भारत के संभावित ऊर्जा सहयोग के बारे में विस्तार से बताया।
पुरी ने लिखा कि आइसलैंड सरकार की उप स्थायी सचिव बर्गडिस एलर्ट्सडोटिर द्वारा भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए आयोजित रात्रिभोज में दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत में आइसलैंड के राजदूत एम्ब बेनेडिक्ट होस्कुलडसन सहित ऊर्जा, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग के विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।
यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण आइसलैंड की अग्रणी कार्बन कैप्चर कंपनी कार्बफिक्स के साथ मंत्री की बैठक रही। कार्बफिक्स उन तकनीकों पर काम करती है, जिनमें कार्बन डाइऑक्साइड को जमीन के नीचे बेसाल्ट चट्टानों में इंजेक्ट कर उसे पत्थर में बदला जाता है। पुरी ने बताया कि भारत के पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में विशाल बेसाल्टिक संरचनाएं मौजूद हैं, जहां इस तकनीक को लागत प्रभावी ढंग से अपनाया जा सकता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरित ऊर्जा संक्रमण की दिशा में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी पहल बताया।
इस यात्रा के दौरान पुरी ने आइसलैंड की सबसे बड़ी भू-तापीय ऊर्जा कंपनी ON Power के सीईओ अर्नी हर्नार हेराल्डसन से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि कंपनी कैसे हेलिशेइदी और नेसजावेलिर भू-तापीय संयंत्रों से बिजली और गर्म पानी का उत्पादन करती है और अंडाकिल्सा हाइड्रो स्टेशन से जलविद्युत उत्पादन करती है। इन संयंत्रों के दौरे और प्रस्तुतियों से यह स्पष्ट हुआ कि आइसलैंड किस तरह से हरित ऊर्जा को आम नागरिकों और उद्योगों के लिए सहज और सुलभ बनाता है।
पुरी ने यह भी कहा कि उन्होंने भारत में, विशेषकर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे पहाड़ी राज्यों में भू-तापीय ऊर्जा की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने आइसलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ करते हुए इसे भारत के लिए एक प्रेरणा बताया और कहा कि ऐसे मॉडल को भारत में अपनाने से हरित परिवहन को तेजी मिल सकती है।
अंत में मंत्री ने आइसलैंड के लोगों और ऊर्जा पेशेवरों की गर्मजोशी और आतिथ्य के लिए आभार प्रकट किया और आशा जताई कि दोनों देश निकट भविष्य में ऊर्जा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में मिलकर नए आयाम स्थापित करेंगे।
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