केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विकास का मुख्य इंजन साबित होगा। सरकार का कहना है कि सुधारों, क्षेत्रीय प्रोत्साहनों और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए इस क्षेत्र को निरंतर समर्थन मिल रहा है।
फिच रेटिंग्स, आईएमएफ और एसएंडपी ग्लोबल जैसी संस्थाओं ने भारत की जीडीपी वृद्धि अनुमान में सुधार किया है। साथ ही एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त 2025 में बढ़कर 59.3 पर पहुंच गया, जो 16 महीने का उच्चतम स्तर है। यह आंकड़े पिछले 17 वर्षों में परिचालन स्थितियों में सबसे तेज सुधार को दर्शाते हैं।
जुलाई 2025 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) सालाना आधार पर 3.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में यह केवल 1.5 प्रतिशत था। यह मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और इलेक्ट्रिसिटी क्षेत्रों में मजबूती का संकेत है। अप्रैल-अगस्त 2025 में भारत का कुल निर्यात 6.18 प्रतिशत बढ़कर 349.35 अरब डॉलर हो गया। इसी अवधि में व्यापारिक निर्यात 184.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 2.52 प्रतिशत अधिक है।
सरकारी अनुमान के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर वित्त वर्ष 2026 तक 87,57,000 करोड़ रुपये (करीब 1 ट्रिलियन डॉलर) का आकार ले सकता है। वहीं 2030 तक यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में सालाना 43,43,500 करोड़ रुपये (500 अरब डॉलर) से अधिक का योगदान देने की क्षमता रखता है।
अगस्त 2025 में पुरुषों की बेरोजगारी दर घटकर 5 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले 5 महीनों का न्यूनतम स्तर है। यह रोजगार सृजन में सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में चल रहे पुनर्गठन के चलते भारत निवेश, नवाचार और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए एक प्रमुख गंतव्य बन सकता है। सरकार का विजन है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल “विश्व का कारखाना” बने बल्कि इनोवेशन और लीडरशिप का भी ग्लोबल हब बनकर उभरे।
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