UN की रिपोर्ट में दाऊद का जिक्र नहीं, भारत ने उठाए सवाल

दाऊद इब्राहिम और डी-कंपनी का इतिहास साफ हुआ

UN की रिपोर्ट में दाऊद का जिक्र नहीं, भारत ने उठाए सवाल

भारत ने एक बार फिर यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में आतंकवाद के मुद्दे पर अपना बहुत मजबूत और साफ स्टैंड रखा है। भारत ने यूनाइटेड नेशंस के स्पेशल रैपोर्टियर ऑन काउंटर-टेररिज्म की रिपोर्ट में गंभीर गलतियों, भेदभाव और नाकामी पर कड़ी नाराजगी जताई। भारतीय डिप्लोमैट (IFS) रघु पुरी ने यूनाइटेड नेशंस के प्लेटफॉर्म से रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठाए हैं और कहा है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रिपोर्ट पब्लिश करना बेहद अफसोस की बात है।

भारत द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने इंटरनेशनल लेवल पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। भारत ने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह की एकतरफा और तथ्यात्मक रूप से गलत रिपोर्ट का पब्लिश होना, जबकि यूनाइटेड नेशंस जैसी सबसे बड़ी ग्लोबल संस्था से निष्पक्षता के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, संगठन की नैतिक वैधता को चुनौती देता है।

दाऊद इब्राहिम और डी-कंपनी के गुनाहों को नज़रअंदाज़ करना माफ़ न करने लायक गलती है।

भारतीय डिप्लोमैट रघु पुरी ने अपने भाषण में UN के रिपोर्टर बेन सॉल की तैयार की गई रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम और उसके गैंग ‘डी-कंपनी’ पर की गई एंट्रीज़ पर कड़ी आपत्ति जताई। रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को सिर्फ़ ‘भारत में मौजूद एक क्रिमिनल गैंग का हेड’ कहा गया था, जिस पर भारत ने कड़ा हमला किया।

रघु पुरी ने UN को उसके अपने ऐतिहासिक फ़ैसलों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बाद दाऊद इब्राहिम भारत में सबसे ज़्यादा वांटेड आतंकवादी अपराधी है। 2003 में, यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) की 1267 सैंक्शन्स कमेटी ने दाऊद इब्राहिम और उसकी डी-कंपनी को अल-कायदा से सीधे लिंक होने की वजह से ग्लोबल आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल किया था। सिक्योरिटी काउंसिल के डॉक्युमेंट्स में यह बात साफ़ तौर पर बताई गई होने के बावजूद, यह बहुत अफ़सोस की बात और लापरवाही है कि स्पेशल रिपोर्टर ने अपनी रिपोर्ट में दाऊद की भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों का कोई ज़िक्र नहीं किया।

पाकिस्तान में पनाह और ओसामा बिन लादेन का ज़िक्र

अपने भाषण में, भारत ने एक बार फिर काउंटर-टेररिज़्म में पाकिस्तान के दोहरे रवैये को सामने लाया। भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में सुरक्षित रह रहा है और उसे वहाँ सरकारी सुरक्षा मिल रही है। यह दुनिया के लिए कोई राज़ नहीं है कि दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधी आज भी उसी देश में आज़ाद घूम रहे हैं जहाँ ग्लोबल टेररिस्ट ओसामा बिन लादेन छिपा था और जहाँ उसे मारा गया था।

इसके बावजूद, भारत ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि UN रिपोर्ट में दाऊद के पाकिस्तान में रहने और भारत के खिलाफ उसके अपराधों का ज़िक्र न करना आतंकवाद का समर्थन करने जैसा है। भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि स्पेशल अधिकारियों का ऐसा नाकाफ़ी और गुमराह करने वाला काम UN की साख को बहुत नुकसान पहुँचा रहा है।

ह्यूमन राइट्स का ढाल के तौर पर इस्तेमाल और जम्मू-कश्मीर पर कड़ा रुख

भारत ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश अब अपने ज़ुल्मों को सही ठहराने और ग्लोबल दबाव से बचने के लिए ह्यूमन राइट्स और काउंटर-टेररिज़्म फ्रेमवर्क का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ह्यूमन राइट्स उन आतंकवादियों के लिए ढाल नहीं हो सकते जो कट्टरपंथ, चरमपंथी सोच फैलाते हैं और बेगुनाह लोगों को मारते हैं। भारत ने एक बार फिर इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी भी वजह से या किसी भी हालत में आतंकवाद को सपोर्ट नहीं किया जा सकता।

साथ ही, पाकिस्तानी डेलीगेशन ने हमेशा की तरह अपने बयान में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की। भारत ने बहुत ही आक्रामक तरीके से जवाब दिया, और साफ-साफ दोहराया कि ‘जम्मू-कश्मीर भारत का एक अहम हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।’ भारत ने पाकिस्तान को कड़ी सलाह दी कि वह दूसरे लोगों के इलाके पर दावा करने के बजाय अपने देश में आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने पर ध्यान दे।

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