26 C
Mumbai
Friday, January 2, 2026
होमक्राईमनामामुर्शिदाबाद हिंसा: बंगाल हिंसा पर इंदौर में बजरंग दल का प्रदर्शन और...

मुर्शिदाबाद हिंसा: बंगाल हिंसा पर इंदौर में बजरंग दल का प्रदर्शन और राष्ट्रपति शासन की मांग!

प्रदर्शनकारियों ने ममता सरकार पर “घुसपैठियों को संरक्षण देने” और “देश विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया।

Google News Follow

Related

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर फैली हिंसा अब सिर्फ राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी आक्रोश की चिंगारी फूटने लगी है। मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में शनिवार (19 अप्रैल) को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मुखर विरोध दर्ज कराया और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की मांग करते हुए कलेक्टर कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।

देश की संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति की स्वीकृति से विधिक रूप से लागू वक्फ संशोधन अधिनियम को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में लागू न करने का ऐलान किया है। इसके बाद से मुर्शिदाबाद हिंसा की आग में झुलस रहा है। मकानों को आग लगाई जा रही है, संपत्ति को तहस-नहस किया जा रहा है, और लोग डर के साए में घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। सुरक्षाबल तैनात हैं, पर हालात बेकाबू हैं।

इन्हीं घटनाओं के विरोध में इंदौर में बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए विश्व हिंदू परिषद के नेता अभिषेक उदेलिया ने कहा, “मुर्शिदाबाद में योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनके घर जलाए जा रहे हैं और अब तक सैकड़ों परिवार पलायन की स्थिति में पहुंच चुके हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “कुछ परिवार तो इलाका छोड़ भी चुके हैं और यह सब ममता बनर्जी की शह पर हो रहा है जो सिर्फ एक वर्ग विशेष के वोट बैंक की राजनीति कर रही हैं।”

प्रदर्शनकारियों ने ममता सरकार पर “घुसपैठियों को संरक्षण देने” और “देश विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया। उनके अनुसार, वर्तमान में ममता सरकार राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल हो चुकी है और वहां केंद्रीय एजेंसियों की दखल और राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि वक्फ संशोधन कानून का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन ममता बनर्जी ने इस पर बार-बार खुलकर विरोध जताया है। वे इस मुद्दे पर मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकातें कर चुकी हैं और इसे “धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला” करार दे चुकी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें स्पष्ट हैं — एक, वक्फ कानून अब केवल विधायी या धार्मिक विवाद नहीं रहा; यह एक गहरी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई का स्वरूप ले चुका है। और दूसरी, देशभर में इसके असर को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है। जब एक राज्य का आंतरिक संकट दूसरे राज्य की सड़कों पर प्रतिरोध बनकर उभरने लगे, तब यह संकेत होता है कि मसला अब सिर्फ कानून या राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का हो चला है।

शांतिपूर्ण समाधान और सच्चाई की मांग अब न्यायपालिका, केंद्र और राज्य तीनों के दरवाजे खटखटा रही है। सवाल यह नहीं कि वक्फ कानून अच्छा है या बुरा — सवाल यह है कि देश की अखंडता और सामाजिक सौहार्द पर चोट की कीमत कौन चुकाएगा?

यह भी पढ़ें:

बीएचयू में माओवादी मानसिकता के प्रसार और ईडब्ल्यूएस आरक्षण घोटाले के खिलाफ एबीवीपी

ब्राम्हणों पर अपमानजनक टिप्पणी पड़ी भारी, माफ़ी मांगने के बाद अनुराग कश्यप पर शिकायत दर्ज!

पश्चिम हिंसा: पीड़ितों को देखकर महिला आयोग प्रमुख की आंखों से छलका दर्द,”उनकी पीड़ा सुनकर नि:शब्द रह गई”!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,528फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
286,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें