इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ पर विवाद: कांग्रेस पार्षदों ने राष्ट्रिय गीत गाने से किया इनकार

धार्मिक आधार पर गाने से किया मना, भाजपा ने जताई आपत्ति

इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ पर विवाद: कांग्रेस पार्षदों ने राष्ट्रिय गीत गाने से किया इनकार

Indore Municipal Corporation's Vande Mataram row: Congress councillors refuse to sing the national anthem

मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बजट बैठक के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस की दो पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबिना इकबाल ने राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कार्यवाही बाधित हो गई। बुधवार (8 अप्रैल) को आयोजित बजट चर्चा बैठक के दौरान जब ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा था, तब दोनों पार्षदों ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया। फौजिया शेख अलीम ने इस निर्देश पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने का कानूनी प्रावधान क्या है।

उनकी आपत्ति के बाद भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालने के लिए नगर निगम अध्यक्ष मुन्नालाल यादव ने फौजिया अलीम को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया।

धार्मिक कारण बताकर किया इनकार

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए रुबिना इकबाल ने कहा कि उनका निर्णय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनुमत नहीं है क्योंकि इसमें पूजा का तत्व शामिल है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह ‘सारे जहां से अच्छा’ गाती हैं।

इकबाल ने इस दौरान भाजपा के साथ-साथ अपनी ही पार्टी कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई होती है, तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकती हैं या असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में शामिल होने पर विचार कर सकती हैं।

BJP ने जताई कड़ी आपत्ति:

भाजपा नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। इंदौर के महापौर पुष्यामित्र भार्गव और नगर निगम अध्यक्ष मुन्नालाल यादव के बीच इस मामले में FIR दर्ज करने को लेकर चर्चा चल रही है। भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के महत्व का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा बताया।

कांग्रेस के भीतर भी विरोध:

इस विवाद पर कांग्रेस के भीतर से भी असहमति के स्वर सामने आए हैं। पार्टी प्रवक्ता केके मिश्रा ने पार्षदों के इस कदम की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह विवाद राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकता है।

इस घटना के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जहां एक पक्ष इसे राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दे रहा है। फिलहाल, इस पूरे मामले में संभावित कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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