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“हमें भागीदारों की तलाश, उपदेशकों की नहीं” विदेश मंत्री एस जयशंकर की दो टूक!

आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम में विदेश मंत्री का बयान

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आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम 2025 के मंच से भारत ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में अपनी सक्रिय और सशक्त उपस्थिति का संदेश दिया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मौके पर विश्व व्यवस्था में हो रहे बदलावों, भारत की भूमिका और यूरोप व अमेरिका की स्थिति पर स्पष्ट, बेबाक और संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत अब उस अवस्था में है, जहां वैश्विक घटनाएं सीधे हमारे हितों से जुड़ती हैं।

जयशंकर ने कहा,“हम अब उस आकार और अवस्था में पहुंच गए हैं, जहां दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली लगभग हर महत्वपूर्ण घटना हमारे लिए मायने रखती है। अमेरिका पहले से अधिक आत्मनिर्भर है, जबकि यूरोप दबाव में है और बहुध्रुवीयता की वास्तविकताओं को अभी पूरी तरह आत्मसात नहीं कर पाया है।”

विदेश मंत्री ने भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत किसी भी वैश्विक साझेदारी में सहयोग और समझ की तलाश करता है, न कि पाखंडपूर्ण उपदेशों की। “जब हम दुनिया को देखते हैं, तो हम भागीदारों की तलाश करते हैं, हम उपदेशकों की तलाश नहीं करते। खास तौर पर, ऐसे उपदेशक जो विदेश में जो उपदेश देते हैं, उसे अपने देश में नहीं अपनाते।”

जयशंकर ने यूरोप की स्थिति को लेकर कहा कि कुछ क्षेत्र अब भी यथार्थ के साथ सामंजस्य बैठाने में संघर्ष कर रहे हैं। “अगर हमें साझेदारी विकसित करनी है, तो कुछ समझ, संवेदनशीलता, आपस के हित और दुनिया कैसे काम करती है, इसका एहसास करना होगा।”

आर्कटिक क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता को भी जयशंकर ने रेखांकित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत इस क्षेत्र में बढ़ती जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रहा है। “कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, संसाधनों, अनुसंधान और अंतरिक्ष में अवसरों को पहचाना है। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग के जोखिमों के बारे में अधिक समझ की मांग की।”

इस इंडिया फोरम 2025 का आयोजन आर्कटिक सर्कल और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा किया गया, जिसमें भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का भी सहयोग रहा। यह आयोजन सिर्फ आर्कटिक क्षेत्र की भौगोलिक या पर्यावरणीय चर्चा नहीं, बल्कि भारत के उभरते वैश्विक दृष्टिकोण की झलक भी बन गया।

जयशंकर के वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब ‘परिधि’ पर खड़ा एक दर्शक नहीं, बल्कि ‘केंद्र’ में बैठा एक सक्रिय और आत्मविश्वासी रणनीतिक साझेदार है।

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