इसका उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन, विचारों, संघर्षों, निर्णयों एवं सामाजिक परिवर्तन की यात्रा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि “नीतीशवाद” सामाजिक न्याय, विकास, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तीकरण और बिहार की अस्मिता पर आधारित एक समावेशी वैचारिक दृष्टि है।
महात्मा गांधी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया तथा जननायक कर्पूरी ठाकुर की वैचारिक परंपरा को आधुनिक प्रशासनिक दृष्टि एवं विकास मॉडल के साथ धरातल पर उतारने का नाम ही नीतीशवाद है।
साथ ही आम नागरिकों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विशेषज्ञों की व्यक्तिगत स्मृतियों को भी वीडियो डॉक्यूमेंटेशन के रूप में संरक्षित किया जाएगा। नीतीश आर्काइव पर उन्होंने लोगों से विचार, वीडियो एवं संस्मरण साझा करने की अपील करते हुए विभिन्न माध्यमों की जानकारी भी दी है।
उन्होंने बताया कि “नीतीश आर्काइव यात्रा” के अंतर्गत एक विशेष टीम अगले नौ महीनों तक बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर नीतीश कुमार से जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियां, फोटो, वीडियो, दस्तावेज एवं व्यक्तिगत अनुभव एकत्रित करेगी।
जदयू के नेता नीरज कुमार ने कहा कि इतिहास में कई महान नेताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियाँ समय के साथ नष्ट हो गईं। “नीतीश आर्काइव” इसी ऐतिहासिक भूल को रोकने तथा बिहार के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास को जनभागीदारी के माध्यम से संरक्षित करने का एक संगठित प्रयास है जो कि आने वाले वर्षों में युवाओं, पत्रकारों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगा।
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