झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद को लेकर चल रहे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां बीते दस दिनों से डीजीपी का पद औपचारिक रूप से खाली है। उन्होंने कहा कि 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को डीजीपी के पद पर तैनात रखा गया है, जबकि वह 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अनुराग गुप्ता को दो वर्षों के लिए डीजीपी बनाए जाने की अधिसूचना झारखंड सरकार द्वारा 2 फरवरी को जारी की गई थी।
मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार न केवल संविधान के अनुच्छेद 312, जो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से जुड़ा है, का उल्लंघन कर रही है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों को भी नजरअंदाज किया गया है।
केंद्र सरकार की ओर से 22 अप्रैल को झारखंड के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता की डीजीपी के तौर पर सेवा विस्तार अखिल भारतीय सेवा नियमावली के अनुरूप नहीं है। केंद्र के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 30 अप्रैल के बाद अनुराग गुप्ता की सेवा को विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता का अभाव है और यूपीएससी से चयनित अधिकारियों को भी कथित तौर पर “रेट लिस्ट” के जरिए कार्य करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में झारखंड सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि विवाद बढ़ता जा रहा है और विपक्ष लगातार सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहा है।
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