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Friday, September 4, 2026
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जीतन राम मांझी को संविधान, पिछड़े वर्गों और दलितों की कोई परवाह नहीं: सुरेंद्र राजपूत!

अगर जीतन राम मांझी को दलितों, संविधान या आरक्षण की परवाह नहीं है, तो उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। जहां तक चिराग पासवान की बात है|

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अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दो घटक दलों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनसे मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है। इसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आईएएनएस से कहा, “जीतन राम मांझी भारतीय जनता पार्टी को खुश करने में इतने आगे निकल गए हैं कि उन्हें अब देश, संविधान, पिछड़े वर्गों या दलितों की कोई परवाह नहीं है।

अगर जीतन राम मांझी को दलितों, संविधान या आरक्षण की परवाह नहीं है, तो उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। जहां तक चिराग पासवान की बात है, अगर आप दलितों और संविधान के साथ खड़े हैं, तो भारतीय जनता पार्टी छोड़ दें। वरना, यह माना जाएगा कि आप सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “चिराग पासवान और मांझी कौन हैं? दोनों मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं। आरक्षण के मुद्दे पर दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जो संविधान के खिलाफ है।

शायद उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि मंत्रिपरिषद पर सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है। कोई मंत्री जो कुछ भी कहता है, वह तब तक सरकार का ही रुख माना जाता है, जब तक कि उसका खंडन न किया जाए।”

वहीं, चिराग पासवान ने एक्स पोस्ट में कहा, “संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसे में एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ या उप-वर्गीकरण की मांग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

जब तक समाज में भेदभाव और असमानता कायम है, तब तक वंचित एवं शोषित वर्गों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा की हमारी लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रहेगी।”

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