न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी होंगे मद्रास उच्च न्यायलय के नए मुख्य न्यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश

न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी होंगे मद्रास उच्च न्यायलय के नए मुख्य न्यायाधीश

Justice Sushrut Arvind Dharmadhikari will be the new Chief Justice of Madras High Court.

‘द केरला स्टोरी 2—गोज़ बियोंड’ मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ का हिस्सा रहे न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाईकोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की सिफारिश की गई है। यह फैसला गुरुवार (26 फरवरी) को हुईसुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में अंतिम रूप से लिया गया।

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी 6 मार्च को पद की शपथ लेने वाले हैं। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव 5 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे। नियुक्ति के बाद न्यायमूर्ति धर्माधिकारी अपनी वर्तमान तैनाती केरला उच्च न्यायालय से चेन्नई स्थित मद्रास हाईकोर्ट में स्थानांतरित होंगे और वहां शीर्ष प्रशासनिक व न्यायिक दायित्व संभालेंगे।

रायपुर के मूल निवासी न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने वर्ष 1992 में अपने विधिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में वकालत की और जटिल दीवानी तथा संवैधानिक मामलों की पैरवी के लिए पहचान बनाई।

वे भारत सरकार के स्थायी अधिवक्ता भी रहे, जहां उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक सहित कई प्रमुख केंद्रीय संस्थाओं का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2016 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2018 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। अप्रैल 2025 में उनका तबादला केरल हाईकोर्ट में किया गया था।

इस नियुक्ति के साथ ही कॉलेजियम ने एक नई प्रशासनिक नीति भी लागू की है। इसके तहत किसी उच्च न्यायालय के लिए चयनित मुख्य न्यायाधीश को पद रिक्त होने से लगभग दो महीने पहले ही नए उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य यह है कि पदभार ग्रहण करने से पहले ही चयनित मुख्य न्यायाधीश स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायालय की कार्यप्रणाली से परिचित हो सकें। कॉलेजियम का मानना है कि इससे न्यायिक दक्षता और प्रशासनिक निरंतरता में सुधार होगा।

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी के 6 मार्च को औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने तक इस प्रक्रिया के तहत उन्हें मद्रास हाईकोर्ट की व्यवस्थाओं से अवगत कराया जाएगा। इस नियुक्ति को न्यायपालिका में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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