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कर्नाटक: राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी विरोधी रुख खा गया मंत्री पद!

'राहुल गांधी को नहीं हजम होता सच

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कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या से मुलाकात के बाद इस्तीफा दिया। सहकारिता मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले के.एन. राजन्ना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं। उनके इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा बटोरी है। पार्टी विरोधी बयान देने के कारण उनसे इस्तीफा मांगा गया। इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा है कि ‘राहुल गांधी को सच हजम नहीं होता, इसलिए उन्होंने राजन्ना का इस्तीफा ले लिया।’

दरअसल कर्नाटक के मंत्री के.एन. राजन्ना ने चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “देखिए… अगर हम ऐसी बातें करने लगेंगे, तो अलग-अलग राय सामने आएंगी। मतदाता सूची कब तैयार हुई थी? यह तब तैयार हुई थी जब हमारी अपनी सरकार सत्ता में थी। क्या उस समय सब आँखें बंद करके चुपचाप बैठे रहे? ये अनियमितताएँ हुईं, यह सच है। इसमें कुछ भी झूठ नहीं है।”

राजन्ना ने कहा, ये अनियमितताएँ हमारी आँखों के सामने हुईं, हमें शर्म आनी चाहिए। हमने उस समय ध्यान नहीं दिया। इसलिए हमें भविष्य में सावधान रहना होगा… महादेवपुर में सचमुच धोखाधड़ी हुई थी। एक व्यक्ति का तीन अलग-अलग जगहों पर पंजीकरण हुआ और तीनों जगहों पर मतदान हुआ।

लेकिन जब मतदाता सूची का मसौदा तैयार होता है, तो हमें उस पर नज़र रखनी चाहिए, है ना? जब मतदाता सूची का मसौदा तैयार होता है, तो हमें आपत्तियाँ उठानी चाहिए। यह हमारी ज़िम्मेदारी है। हम उस समय चुप रहे और अब हम बोल रहे हैं, राजन्ना ने कहा था।

इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राजन्ना के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, केएन राजन्ना पूरी तरह से गलत हैं। उन्हें जानकारी नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री और हमारे पार्टी का आलाकमान इसका जवाब देगा। इस विवाद के बीच, के. एन. राजन्ना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने मंत्री के. एन. राजन्ना के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी का बयान झूठा है। मतदाता सूची में गड़बड़ी कांग्रेस के समय में हुई थी। राजन्ना ने यह बात स्पष्ट रूप से कही थी। लेकिन राहुल गांधी को यह सच सुनना मुश्किल लगा। इसलिए उन्होंने सिद्धारमैया को बताया और के. एन. राजन्ना का इस्तीफा ले लिया। संविधान की प्रति लेकर घूमने वाले और अंबेडकर की बात करने वाले राहुल गांधी इस सच को पचा नहीं पा रहे हैं। राजन्ना को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना गलत है।”

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