केरल के एर्नाकुलम जिले के पलुरुथी स्थित सेंट रीटा पब्लिक स्कूल में हिजाब विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया है कि मुस्लिम छात्राओं को स्कूल परिसर में हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। यह निर्देश मंगलवार (13 अक्टूबर) को राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने जारी किया, जिन्होंने स्कूल के ड्रेस कोड को दरकिनार करते हुए आठवीं कक्षा की छात्रा को हिजाब पहनने की अनुमति देने का आदेश दिया। यह स्कूल लैटिन कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित और सीबीएसई से संबद्ध है। प्रशासन ने पहले छात्रा की हिजाब पहनने की मांग यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि यह स्कूल के ड्रेस कोड के खिलाफ है।
गौरतलब है कि मंत्री का यह निर्देश सोमवार को ही छात्रा के पिता और स्कूल प्रबंधन के बीच एर्नाकुलम सांसद हिबी ईडन तथा कुछ कांग्रेस नेताओं की मध्यस्थता से विवाद सुलझता देख आया। उस वक्त छात्रा के पिता ने कहा था, “मेरी बेटी उसी स्कूल में यूनिफॉर्म के साथ पढ़ाई जारी रखेगी। मैं नहीं चाहता कि इस मुद्दे को कुछ लोग राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करें।”
लेकिन मंगलवार (14 अक्तूबर)को शिक्षा मंत्री ने बताया कि छात्रा के पिता की शिकायत के बाद एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन ने जांच की, जिसमें स्कूल प्रबंधन की गंभीर चूक सामने आई। मंत्री ने कहा कि छात्रा को हिजाब पहनने पर कक्षा से निकालना ‘घोर अनुशासनहीनता और उसके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन’ है। उन्होंने कहा, “स्कूल प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई असंवैधानिक है।” मंत्री ने निर्देश दिया कि छात्रा को धार्मिक विश्वास के तहत हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। साथ ही कहा कि हिजाब का रंग और डिज़ाइन स्कूल तय कर सकता है। स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर को 15 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजे तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
Thiruvananthapuram | On Catholic school shut for two days after row over student wearing hijab, Kerala Education Minister V. Sivankutty says, "There was an issue at St. Rita’s School in Ernakulam regarding students’ uniforms, and a child was not allowed to enter the classroom.… pic.twitter.com/U2GcOMOCcM
— ANI (@ANI) October 15, 2025
इधर हिजाब विवाद के बाद स्कूल को केरल हाईकोर्ट से सुरक्षा प्रदान की गई है। अदालत ने यह आदेश तब दिया जब छात्रा के परिवार और समर्थकों द्वारा परिसर में प्रदर्शन किए जाने के बाद स्कूल दो दिनों तक बंद रखना पड़ा। स्कूल की याचिका में कहा गया कि 10 अक्टूबर को छात्रा के पिता और कुछ लोगों ने जबरन कैंपस में प्रवेश कर आए, सुरक्षा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और नारेबाजी की, जिससे छोटे बच्चों में डर का माहौल बना और अफरातफरी मच गई। स्कूल ने स्थानीय पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए अदालत से तत्काल सुरक्षा की मांग की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एन. नागरेश ने टिप्पणी की कि सेंट रीटा स्कूल 1998 से एक धर्मनिरपेक्ष संस्था के रूप में कार्यरत है और सभी अभिभावकों ने प्रवेश के समय स्कूल के यूनिफॉर्म नियमों का पालन करने की लिखित सहमति दी थी। अदालत ने ‘फातिमा तसनीम बनाम स्टेट ऑफ केरल’ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि “व्यक्तिगत अधिकार संस्थागत अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकते।”
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