गिरिडीह जिले के खंडोली डैम से जुड़ा जमीन विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार (8 सितंबर) को इस विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, जब सैकड़ों ग्रामीण जलसमाधि लेने के इरादे से डैम पर पहुंचे। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के बैनर तले चल रहे “खंडोली बचाओ अभियान” के तहत ग्रामीण पहले से ही सामूहिक जलसमाधि आंदोलन की घोषणा कर चुके थे। उनका आरोप है कि डैम के सीमांकन के नाम पर उनकी पुश्तैनी और रैयती जमीन को जबरन डैम क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1992 में दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) ने डैम निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन उस समय सीमांकन स्पष्ट रूप से नहीं हुआ। अब प्रशासन जमीन का गलत तरीके से अधिग्रहण कर रहा है और कोई आधिकारिक दस्तावेज भी नहीं दिखा रहा।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें बिना मुआवजा और पुनर्वास के बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों ने पहले ही अंचल अधिकारी और जिला प्रशासन को आठ सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा था। इसमें जमीन का पुन: सीमांकन, रैयतों की जमीन वापस करने, विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास देने जैसी मांगें शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जेएलकेएम नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 15 दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण सामूहिक रूप से डैम में जलसमाधि लेंगे। सोमवार को हुए इस प्रदर्शन के बाद खंडोली डैम इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
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