संसदीय कार्यवाही में बढ़ते तनाव के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुर्लभ नरमी दिखाते हुए अपने खिलाफ लाए गए विपक्ष के नोटिस को सीधे खारिज करने के बजाय उसमें मौजूद त्रुटियों को सुधार कर आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। अध्यक्ष ने नैतिक आधार का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि जब तक यह प्रस्ताव निपट नहीं जाता, तब तक वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे।
10 फरवरी को कांग्रेस के नेतृत्व में INDI गठबंधन के विपक्षी दलों द्वारा नोटिस प्रस्तुत किया गया था। 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस नोटिस में अध्यक्ष पर खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण आचरण और संवैधानिक पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 94(c) का उल्लेख है, जिसके तहत लोकसभा अध्यक्ष को सदन के बहुमत से पारित प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है।
हालांकि, नोटिस में कई तथ्यात्मक त्रुटियां पाई गईं। दस्तावेज़ में चार बार 2 फरवरी 2025 का उल्लेख किया गया था, जबकि सही तिथि 2 फरवरी 2026 है। नियमों के तहत ऐसी गलतियों के आधार पर अध्यक्ष के पास इस नोटिस को अस्वीकार करने का विकल्प उपलब्ध था। इसके बावजूद, ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि तारीखों समेत अन्य त्रुटियों को दुरुस्त कर प्रस्ताव को शीघ्रता से आगे बढ़ाया जाए। लोकसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, “नोटिस को बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। संशोधित नोटिस प्राप्त होने के बाद, निर्धारित नियमों के अनुसार इसकी त्वरित जांच की जाएगी।”
नोटिस में उठाई गई शिकायतें हाल ही में बजट सत्र के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ी हैं। 2 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का हवाला देने की कोशिश की थी, जिसे कथित तौर पर पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से जुड़ा बताया गया था। नियमों के अनुसार इसकी अनुमति न मिलने के बाद विपक्षी सांसदों ने कई दिनों तक सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में लोकसभा में दिया जाने वाला भाषण रद्द करना पड़ा। अध्यक्ष की ओर से यह कहा गया कि उनके पास विश्वसनीय जानकारी थी कि विपक्षी सांसद भाषण के दौरान शारीरिक रूप से बाधा डालने की योजना बना रहे थे। कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में विपक्षी दलों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। हालांकि, यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक माना जा रहा है क्योंकि 543 सदस्यीय लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 293 सीटों का बहुमत है। इसके अलावा, INDI गठबंधन के सभी दल इस पहल पर एकजुट भी नहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले अध्यक्ष के समक्ष सीधे शिकायतें रखी जानी चाहिए थीं और उन्हें जवाब देने का समय दिया जाना चाहिए था, उसके बाद ही अविश्वास प्रस्ताव जैसे कदम पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसे दलों से भी अध्यक्ष को समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है, जो किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।
यह भी पढ़ें:
स्विस फेडरल काउंसिल की सदस्या का बात करने का तरीका पसंद नहीं आया तो ट्रंप ने बढ़ाए टैरिफ
लंदन: 13 वर्षीय छात्र ने “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाकर दो सहपाठियों पर किया चाकू से हमला
मुंबई में 44 साल बाद भाजपा का मेयर; रितु तावड़े ने मेयर का पद संभाला



