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Saturday, October 31, 2026
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भारत की अगुवाई में ब्रिक्स की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, संयुक्त बयान पर सहमति! 

यह सहमति इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही ब्रिक्स मंच का हिस्सा हैं, जबकि पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर इनके बीच गंभीर मतभेद हैं।

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भारत की अगुवाई में ब्रिक्स को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सदस्य देशों ने संयुक्त बयान साझा करने पर सहमति जता दी है। यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और समूह का हिस्सा ऐसे देश भी हैं जो कई मुद्दों पर एक दूसरे के साथ नहीं हैं। शिखर सम्मेलन के पहले दिन यानी शनिवार को ही इसे जारी किए जाने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर बातचीत सुबह 4 बजे तक चली। कई अहम और विवादित मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे।

बताया जा रहा है कि भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सभी देशों को एक राय पर लाने की कोशिश की। यह सहमति इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही ब्रिक्स मंच का हिस्सा हैं, जबकि पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर इनके बीच गंभीर मतभेद हैं।

सूत्र ने कहा, “पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते टकराव के बीच इन देशों को संयुक्त बयान के लिए सहमत कराना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी। भारत की कोशिशों से इन मतभेदों को ब्रिक्स की बातचीत पर हावी नहीं होने दिया गया और सभी देश साझा बयान पर सहमत हो गए।”

इस तरह भारत ने बातचीत के जरिए इन मतभेदों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। संयुक्त बयान आज जारी किया जाएगा।

जानकार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की तारीफ कर रहे हैं क्योंकि नई दिल्ली ने दुनिया भर में चल रहे संघर्षों के बीच ब्रिक्स में गतिरोध को सफलतापूर्वक संभाला है।

इससे पहले ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मतभेद की वजह से मई में राजधानी में हुई ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक ब्लॉक के इतिहास में पहली बार बिना किसी आम संयुक्त बयान के खत्म हुई थी।

इसके बजाय, ईरान और यूएई के बीच गहरे मतभेदों की वजह से सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई, इसलिए भारत ने सिर्फ ‘अध्यक्ष का बयान’ और ‘परिणाम दस्तावेज’ जारी किया था।

भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते आए हैं कि टकराव सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा।

सबसे खास बात ये भी है कि अपनी जी20 अध्यक्षता की तरह ही, ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे भारत ने इस समूह को पश्चिम-विरोधी बनाए बिना ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को बढ़ाने पर जोर दिया।

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