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Thursday, January 1, 2026
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​’​मन की बात’: खुदीराम बोस को नमन, पीएम मोदी ने किया याद!

उनका चेहरा गर्व से भरा था, डर का नामोनिशान नहीं था। जेल के बाहर हजारों लोग एक वीर को अंतिम विदाई देने जुटे थे। पीएम मोदी ने कहा कि उनका बलिदान आज भी प्रेरणा देता है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के ताजा एपिसोड में रविवार को स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर में 18 वर्षीय खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी।​ उनका चेहरा गर्व से भरा था, डर का नामोनिशान नहीं था। जेल के बाहर हजारों लोग एक वीर को अंतिम विदाई देने जुटे थे। पीएम मोदी ने कहा कि उनका बलिदान आज भी प्रेरणा देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के ताजा एपिसोड में रविवार को स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूत खुदीराम बोस को याद किया। उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस ने बहुत ही कम उम्र में देश के लिए बलिदान दिया, जो आज भी हम सभी को प्रेरणा देता है।
पीएम मोदी ने बताया कि यह घटना 11 अगस्त 1908 की है। उस दिन का सुबह का वक्त था और जगह थी बिहार का मुजफ्फरपुर शहर। अंग्रेज सरकार ने खुदीराम बोस को फांसी देने की तैयारी कर ली थी।

​बता दें की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के ताजा संस्करण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खुदीराम बोस को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि 11 अगस्त 1908 को बिहार के मुजफ्फरपुर में मात्र 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी, लेकिन उनके चेहरे पर डर नहीं, गर्व था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “जेल के बाहर हजारों लोग एक वीर को अंतिम विदाई देने के लिए जुटे थे। हर गली और चौराहा शांत था, लेकिन लोगों के दिलों में ज्वाला थी।” पीएम मोदी ने इस अवसर पर खुदीराम बोस के साहस, देशभक्ति और त्याग को प्रेरणास्रोत बताया।

उन्होंने कहा, “खुदीराम बोस का बलिदान आज भी हमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। हमें उनके जैसे वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को सदैव याद रखना चाहिए।”

खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने ब्रिटिश अफसर किंग्सफोर्ड को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, जो अंततः असफल रही, लेकिन उन्हें फांसी की सजा दी गई। उनका बलिदान आज भी भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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