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Sunday, October 4, 2026
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मनोज जरांगे ने फिर से शुरू किया अनशन, पुलिस का नोटिस जारी, 10 शर्तें लागू!

उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों से बाहर निकलें, विरोध स्थल पर इकट्ठा हों और इस मकसद के लिए एकजुट रहें।

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सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार को अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर फिर से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि समुदाय का तीन साल का संघर्ष अब ‘जीत के करीब’ है।

उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों से बाहर निकलें, विरोध स्थल पर इकट्ठा हों और इस मकसद के लिए एकजुट रहें।

आमरण अनशन से पहले पुलिस ने मनोज जरांगे पाटिल को नोटिस भेजा। जालना पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 168 के तहत यह नोटिस जारी किया है और अनशन के लिए 10 सख्त शर्तें लगाई।

इस नोटिस में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अनशन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस नोटिस को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

अनशन की वजह से ट्रैफिक जाम नहीं होना चाहिए। गाड़ियों की पार्किंग तय जगह पर ही होनी चाहिए। इसके लिए स्वयंसेवक नियुक्त करें और उनके नाम व मोबाइल नंबर पुलिस को दें। ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। समय-समय पर पुलिस और प्रशासन जो दिशा-निर्देश देगा, उसका पालन करना होगा।

अगर अनशन की रूपरेखा या तरीके में कोई बदलाव होता है, तो पहले पुलिस को जानकारी देनी होगी। जालना जिलाधिकारी द्वारा लागू जमावबंदी और हथियारबंदी आदेश का कड़ाई से पालन करना होगा। अनशन स्थल पर बिजली न जाए, इसके लिए आयोजकों को जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी।

आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसका पूरा ध्यान रखना होगा। किसी भी जाति, धर्म या समाज की भावनाएं आहत न हों। मंच से कोई भी भड़काऊ या उकसाने वाला भाषण नहीं दिया जाना चाहिए। अनशन स्थल और आस-पास ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट की मुंबई और औरंगाबाद बेंच द्वारा विभिन्न याचिकाओं में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

इस नोटिस पर मनोज जरांगे पाटिल ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि उनका अनशन शांतिपूर्ण है। अंतरवाली में यह आमरण अनशन पिछले तीन सालों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और आगे भी शांतिपूर्ण ही रहेगा।

मनोज जरांगे ने लिखा कि सरकार ही कानूनों का उल्लंघन करती है और पुलिस बल का इस्तेमाल कर मराठा समाज पर अत्याचार करती है, जैसा कि पहले के आंदोलनों में हुआ है। यदि कोई भी अनुचित घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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